यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के बावजूद देश के 67 फीसदी लोगों को बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग, नेशनल हेल्थ मिशन और मेडिकल कॉलेजों में तालमेल न होने से सरकार की योजनाओं का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा।
आईजीएमसी शिमला में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस के आखिर दिन हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक भारद्वाज ने खुलासा किया।
उन्होंने दावा किया कि देश में 67 फीसदी और पूरी दुनिया में 32 फीसदी यानी 40 करोड़ जनता इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करती है। इससे कई परिवार गरीबी रेखा के नीचे पहुंच जाते हैं।
सरकार की यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का मुख्य मकसद सभी लोगों को मुफ्त उपचार देना है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत मरीजों ऑपरेशन के साथ-साथ दवाएं भी मुफ्त मिलती हैं, जिससेे यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।
इसके लिए मेडिकल कॉलेज महत्वपूर्ण सोर्स बन सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग, नेशनल हेल्थ मिशन और मेडिकल कॉलेजों में तालमेल की कमी के कारण मरीजों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा। इसी बीच हिमाचल, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, यूपी, महाराष्ट्र, वेस्ट बंगाल, बिहार और हरियाणा से आए प्रतिभागियों ने कांफ्रेंस में हिस्सा लिया।