पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 से अंग्रेज सरकार पूरी तरह से टूट गई थी औ रभंयकर अत्याचार किए। हजारों देश भक्तों को काले पानी की जेल में डाला। उसके बाद अंग्रेजों ने दो निर्णय किए।
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ने करीब 500 करोड़ खर्च कर जाति आधार पर जनगणना की। इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हो गई। देश के सामने इसके कारण एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 से अंग्रेज सरकार पूरी तरह से टूट गई थी औ रभंयकर अत्याचार किए। हजारों देश भक्तों को काले पानी की जेल में डाला। उसके बाद अंग्रेजों ने दो निर्णय किए।
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भारत पर हमेशा राज करने के लिए हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोगों को लड़ाना और जातियों के आधार पर देश को बांटना। इन दोनों के माध्यम से वे भारत को इस प्रकार बांटना चाहते थे कि फिर कभी आजादी की बात न करें। महात्मा गांधी के नेतृत्व में इसका प्रबल विरोध हुआ। 1931 में पहली बार जाति आधारित जनगणना की गई। इसके प्रबल विरोध के कारण उसका परिणाम कभी देश को नहीं बताया गया।
उन्होंने कहा कर्नाटक ने भी एक बार जाति आधारित जनगणना करवाई थी। लेकिन विरोध के कारण उसका परिणाम कभी नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा देश का दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि जातियों के नाम पर अंग्रेज भारत को बांटने में सफल नहीं हुए। लेकिन वही काम अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और कांग्रेस कर रही है। उन्होंने कहा कि अग्रेजों के इस षड्यंत्र में गांधी और पंडित नेहरू ने विरोध किया। लेकिन आज उसी का समर्थन राहुल गांधी और कांग्रेस कर रही है।