सांसद शांता कुमार ने कहा कि मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वे सक्रिय राजनीति को अलविदा कह देंगे। इसके बाद किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस बार भी चुनाव लड़ने से मना किया था। दो लोगों के नाम पार्टी को बताए थे, लेकिन सर्वे रिपोर्ट आने के बाद पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें चुनाव लड़ने को बाध्य किया।
शांता हिमाचल के चंबा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। बकौल शांता उन्होंने 82 साल की उम्र पूरी कर ली है। पूरी फिटनेस के साथ लोगों की सेवा की है। अब भविष्य में कोई भी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, यह वे पार्टी हाईकमान को बताएंगे।
भविष्य में उसकी और पार्टी की जीत के लिए काम करेंगे। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नोटबंदी के रूप में कठोर, मगर सही कदम उठाया है। उम्मीद थी कि देशहित में सभी राजनीतिक दल इसका समर्थन करेंगे।
लेकिन काली कमाई को जाता देख कुछ दलों ने नोटबंदी का विरोध किया और पूरी ताकत से योजना को फेल करने में जुट गए। नोटबंदी समुद्रमंथन की तरह था, जिसमें अमृत और विष दोनों निकले हैं।
कुछ बैंक अधिकारियों ने भी भ्रष्टाचार की सीमाएं लांघी हैं, जिन्होंने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए जारी पैसे को चोर दरवाजे से अमीर लोगों के घरों तक पहुंचा दिया। कहा कि भारत सरकार का खुफिया तंत्र ऐसे लोगों को पकड़ने में जुटा है।
बड़े पैमाने पर कामयाबी भी मिली है। कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों। केंद्र सरकार इस पर भी विचा कर रही है। इससे देश पर बढ़ते आर्थिक बोझ से निजात मिलेगी।