उपमंडल की दूरदराज पंचायत रनोल में 29 वर्ष बाद देवता खंटू की शांद महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। सात जनवरी से शुरू होने वाले तीन दिवसीय शांद महायज्ञ में करीब पचास हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है। इसके लिए देवता कमेटी विशेष प्रबंध कर रही है। रनोल गांव से सात किलोमीटर पीछे देविधार में छोटे वाहनों को खड़ा करने का प्रबंध किया है। देविधार से रनोल गांव के लिए निगम की तीन विशेष बसें दिन भर चलेंगी।
प्रेस वार्ता में यह जानकारी देवता खंटू के मोतमीन जयईंद्र सिंह कुपवाण व कायथ बलदेव सिंटियाण ने दी। उनके साथ मंदिर के कारदार भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि शांद महायज्ञ में आठ खूंद (देवता व देवलु) विशेष रूप से शामिल होंगे। जाबल से नारायण देवता, पुजारली से महादेव देवता, रोहल से पवासी देवता, थली से गुडारू देवता, देविधार से खंटू देवता, टोड़सा से परशुराम, नंडला से परशुराम, धगोली से परशुराम देवता शामिल होंगे। सात जनवरी को देवता और देवलुओं के आगमन के साथ संघेड़ा रस्म निभाई जाएगी।
आठ जनवरी को शिखा फेर की मुख्य रस्म होगी। नौ जनवरी को उछड़ पाछड़ रस्म के साथ देवताओं की विदाई होगी। देवताओं का संघ हथियारों से लैस देवलुओं का नृत्य कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान रनोल में ट्रैफिक व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए देविधार से आगे छोटे वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी।
रनोल में मंदिर कमेटी भंडारे की व्यवस्था भी करेगी। शांद महायज्ञ रनोल, कोयला, बचाड़ी, शरण, गुमणा, टिपरोली, जहलोट और अंबोई गांव के लोग क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए देवता खंटू के निर्देश अनुसार करवा रहे हैं। इस दौरान मंदिर के कारदार मियां राम, जगदीश, ईश्वर और दौलत सिंह भी मौजूद रहे।