रिपोर्ट में बताई खामियों पर विवि प्रशासन को घेरा
फीस बढ़ोतरी विद्यार्थियों पर है अतिरिक्त बोझ : सेक्टा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की कार्यप्रणाली पर केंद्र सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है।
रिपोर्ट के विधानसभा में पेश होते ही स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और अकादमिक भ्रष्टाचार तथा फीस बढ़ोतरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शन के दौरान एसएफआई के राज्य सचिव सन्नी सेक्टा और राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अकादमिक भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मार्च 2023 को समाप्त अवधि के लिए तैयार कैग रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था, नियुक्तियों और शोध गतिविधियों में व्यापक खामियों का खुलासा हुआ है। फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव को छात्रों पर अतिरिक्त बोझ करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
छात्रों ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 से 2023 के बीच विश्वविद्यालय में 27 से 37 प्रतिशत तक संकाय पद खाली रहे जिससे शिक्षण कार्य और छात्रों के शैक्षणिक मार्गदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ा। इसी अवधि में 186 नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन तक नहीं किया जबकि एक अयोग्य सहायक प्राध्यापक और एक अतिथि संकाय की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विपरीत पाई गई। कैग रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था को भी कमजोर बताया गया है। शोध के क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक पाई गई, जहां तीन वर्षों में प्रति शिक्षक औसतन केवल 0.1 शोध परियोजना शुरू हुई। विश्वविद्यालय में स्थापित 16 में से 11 यूजीसी पीठ अधिसूचना के 25 साल बाद भी सक्रिय नहीं हो सकीं।