केंद्र सरकार ने हिमाचल को झटका देते हुए 200 नई पेयजल योजनाओं को खारिज कर दिया है। कहा गया है कि केवल ऑनगोइंग योजनाओं को ही बजट दिया जाएगा। जिन योजनाओं के टेंडर हो चुके हैं लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है, उन्हें बजट नहीं दिया जाएगा। केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि जिन योजनाओं का 75 फीसदी काम हुआ है, पहले उन्हें पूरा किया जाए।
नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की बैठक में केंद्र सरकार ने पहले उन योजनाओं को गंभीरता से लेने को कहा है, जिनका काम 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। उसके बाद 50 से 75 प्रतिशत वाली योजनाओं का काम पूरा करने को कहा गया है। नई स्कीमों को बनाने के लिए अभी फंड देने से साफ इनकार किया है।
केंद्र ने दो टूक कहा है कि काम पूरा करने के इन निर्देशों के बाद ही राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत दूसरी किस्त जारी की जाएगी। ऐसा करने की हिमाचल सरकार को अंडरटेकिंग देनी होगी। आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता अनिल बाहरी ने माना कि केंद्र के नए निर्देशों की राज्य स्तरीय स्कीम सेंक्शनिंग कमेटी में चर्चा हुई है। विभाग का ध्यान अब उन ऑनगोइंग स्कीमों पर है।
सूबे में 563 योजनाएं ऑनगोइंग
हिमाचल में 563 योजनाएं ऑनगोइंग हैं। 350 योजनाएं ऐसी हैं, जिनका 75 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। 162 योजनाओं का काम पूरा करने के लिए हिमाचल सरकार ने अपने स्तर पर 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं।