हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की कंडक्टर भर्ती में हुए घोटाले के बाद एक और बड़ा मामला सामने आया है। भर्ती कमेटी के अध्यक्ष बने मुख्य महाप्रबंधक को टेलीफोन पर ही सेवा विस्तार दिया गया है, जबकि एचआरटीसी में किसी भी अधिकारी व
कर्मचारी को सेवा विस्तार देने का कोई नियम ही नहीं है। इसका खुलासा आरटीआई से मिली सूचना में हुआ है। इसमें बताया गया कि सेवा विस्तार को लेकर न तो निदेशक मंडल में प्रस्ताव डाला गया और न ही कैबिनेट में। यह सूचना हिमाचल परिवहन मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष शंकर सिंह ठाकुर ने प्राप्त की है।
कहा, एचआरटीसी में सेवा विस्तार को कोई नियम ही नहीं
रविवार को बिलासपुर में आरटीआई की सूचना के दस्तावेज दिखाते हुए शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि उक्त अधिकारी को सेवा विस्तार देने के लिए कौन अधिकारी/कमेटी अधिकृत है तथा सेवा विस्तार कितने समय का दिया गया है।
इसमें बताया गया है कि इस प्रकार की कोई मेटी गठित नहीं है। लेकिन मुख्य महाप्रबंधक को 1-10-2016 से 31-3-2017 तक छह माह का सेवा विस्तार दिया गया है। इसके अलावा क्या सेवा विस्तार पाने वाला उक्त अधिकारी निगम की भर्ती कमेटियों का अध्यक्ष रह सकता है?
तो फिर कैसे दे दिया सेवा विस्तार
इस प्रश्न पर कोई भी सूचना उपलब्ध न होने की बात कही गई है। सवाल यह उठता है कि जब निगम में सेवा विस्तार का कोई नियम ही नहीं है, तो मुख्य महाप्रबंधक को कैसे सेवा विस्तार दे दिया गया? मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे परिवहन मंत्री को
मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए। ठाकुर ने कहा कि इस मामले को लेकर आगामी 15 फरवरी को शिमला में संघ की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। इसमें अहम निर्णय लिए जाएंगे। संघ इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने से पीछे नहीं हटेगा।