फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोहतांग टनल में सेरी नाला बीआरओ के लिए बना चुनौती

Tue, 24 Apr 2018 01:05 PM IST
राकेश राणा, अमर उजाला, कुल्लू
विज्ञापन
विज्ञापन

सामरिक महत्व की रोहतांग टनल की खुदाई भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन बीआरओ के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। टनल के ऊपर बह रहे सेरी नाला की वजह से भीतर के 520 मीटर क्षेत्र में लीकेज नहीं रुक रही है। टनल में पानी भर रहा है। इसे रोकने के लिए ही सीमा सड़क संगठन को आठ माह लगेंगे।

विज्ञापन


विशेषज्ञों की राय के बाद अब नाले का रुख नहीं मोड़ा जाएगा, टनल के भीतर से ही लीकेज को रोकने और पानी को बाहर निकालने का पक्का प्रबंध किया जाएगा। सेरी नाले की वजह से ही रोहतांग टनल की खुदाई का काम करीब तीन साल 2012 से 2014 तक बंद रहा। नतीजतन टनल की लागत 1600 करोड़ से चार हजार करोड़ तक पहुंच गई। टनल से यातायात बहाली का लक्ष्य भी इससे पांच साल आगे 2019 तक बढ़ गया। 

रोहतांग दर्रे के नीचे 8.8 किलोमीटर लंबी इस टनल की दोनों छोरों से खुदाई सितंबर 2017 में पूरी हो चुकी है। अब टनल के अंदरूनी कार्य जारी हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सेरी नाले के पानी की लीकेज को रोकना है। टनल में 490 मीटर से आगे करीब 520 मीटर क्षेत्र में सेरी नाला की लीकेज है।
विज्ञापन


बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक ब्रिगेडियर मोहन लाल ने बताया कि आठ माह में रोहतांग टनल के भीतर सेरी नाला की लीकेज पर काबू पा लिया जाएगा। विशेषज्ञ इसमें जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि लीकेज रोकने और टनल के अंदर के कार्य साथ-साथ चलेंगे। उन्होंने तय समय पर यातायात बहाली का दावा किया। 

विज्ञापन

शीट्स लगाकर रोकी जाएगी लीकेज

बीआरओ के चीफ इंजीनियर एनएम चंद्र राणा ने बताया कि रोहतांग टनल में सेरी नाले के पानी की लीकेज रोकने के लिए रणनीति बना ली है। नाले के रुख को मोड़ने के बजाए वैकल्पिक उपाय कर रहे हैं। टनल के डिजाइन के हिसाब से शीट्स लगाकर पानी को नालियों के जरिये बाहर निकाला जाएगा। 

50 किमी कम होगी मनाली-लेह की दूरी- रोहतांग टनल की खुदाई का काम जून 2010 में शुरू हुआ था। उस समय 2014 तक टनल कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। फिर 2017 और अब दिसंबर 2019 तय किया गया है।

रोहतांग टनल में कई अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। टनल बनने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी 50 किलोमीटर कम होगी। छह माह तक बर्फ से लकदक रहने वाली लाहौल घाटी टनल से 12 महीने शेष विश्व से जुड़ी रहेगी। इससे घाटी के पर्यटन को भी पंख लगेंगे।

मोदी जता चुके हैं उद्घाटन की इच्छा- रोहतांग टनल पर रक्षा मंत्रालय लगातार नजर रखे हुए है। टनल से चीन बार्डर तक सेना आसानी से पहुंच बना सकेगी। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी भी कुल्लू दौरे के दौरान रोहतांग टनल के उद्घाटन की इच्छा जता चुके हैं। सितंबर 2017 में टनल के दोनों छोर जुड़ने पर केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी जायजा ले चुकी हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें