बीआरओ के चीफ इंजीनियर एनएम चंद्र राणा ने बताया कि रोहतांग टनल में सेरी नाले के पानी की लीकेज रोकने के लिए रणनीति बना ली है। नाले के रुख को मोड़ने के बजाए वैकल्पिक उपाय कर रहे हैं। टनल के डिजाइन के हिसाब से शीट्स लगाकर पानी को नालियों के जरिये बाहर निकाला जाएगा।
50 किमी कम होगी मनाली-लेह की दूरी- रोहतांग टनल की खुदाई का काम जून 2010 में शुरू हुआ था। उस समय 2014 तक टनल कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। फिर 2017 और अब दिसंबर 2019 तय किया गया है।
रोहतांग टनल में कई अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। टनल बनने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी 50 किलोमीटर कम होगी। छह माह तक बर्फ से लकदक रहने वाली लाहौल घाटी टनल से 12 महीने शेष विश्व से जुड़ी रहेगी। इससे घाटी के पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
मोदी जता चुके हैं उद्घाटन की इच्छा- रोहतांग टनल पर रक्षा मंत्रालय लगातार नजर रखे हुए है। टनल से चीन बार्डर तक सेना आसानी से पहुंच बना सकेगी। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी भी कुल्लू दौरे के दौरान रोहतांग टनल के उद्घाटन की इच्छा जता चुके हैं। सितंबर 2017 में टनल के दोनों छोर जुड़ने पर केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी जायजा ले चुकी हैं।