केंद्रीय जल संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग की वर्ष 2015 थीम जल क्रांति अभियान पर डिग्री कॉलेज में कार्यशाला हुई। कॉलेज प्राचार्य प्रो. आरपी चोपड़ा मुख्य अतिथि थे। विभाग के क्षेत्रीय निदेशक एनपीएस नागी ने जल प्रबंधन के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जल संरक्षण के लिए उचित प्रबंधन की आवश्यकता है।
मौसम परिवर्तन और जिला ऊना के नाकेर खड्ड़ में जल प्रबंधन कृत्रिम विधि पर भी चर्चा की गई। धर्मशाला कॉलेज के जियोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. सुनील धर ने बताया कि पृथ्वी के 10 प्रतिशत हिस्से में ग्लेशियर हैं। इनमें भूमि का 70 प्रतिशत मात्रा में जल भरा है। ग्लोबल वार्मिंग से आने वाले 50 सालों में मालदीव पूरी तरह जलमग्न हो जाएगा।
डा. सुनील धर ने बताया कि भूकंप आने की सटीक जानकारी मिलने को अभी और 50 वर्ष इंतजार करना पड़ सकता है। कार्यशाला में केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड अधिकारी जेएस शर्मा, दलेल सिंह, वरिष्ठ जियोफिसिस्ट एससी कपिल, विद्यानंद नेगी, विपिन कुमार, रचना भाटी, डा.एसके सरताज मोहम्मद वाशा, विद्या भूषण जुगल किशोर शमिल रहे।