उत्तर भारत को बिजली और पानी मुहैया करवाने वाले सतलुज नदी पर बने भाखड़ा बांध की सुरक्षा में कई छेद हैं। डैम की सुरक्षा में कितनी बड़ी चूक हो रही है, इसका ताजा उदाहरण यह है कि यहां आज तक एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया है।
यही नहीं सर्चिंग टावर, बूम बैरियर और दूरबीन तक सुरक्षा कर्मियों के पास नहीं है। सुरक्षा के नाम पर मात्र एक कंपनी तैनात है। ऐसे में कोई भी संदिग्ध आसानी से यहां घुस सकता है। हिमाचल और पंजाब की सीमा पर बने इस डैम में काम कर रहे कई कर्मचारियों को पहचान पत्र भी जारी नहीं हुए है।
नंगल से भाखड़ा तक का 10 किमी सड़क मार्ग जंगल क्षेत्र में है। ऐसे में वर्कर होने का हवाला देकर कोई भी सुरक्षाकर्मियों को गच्चा दे सकता है। ये सबसे बड़ी व्यवस्थागत खामी है।
ऐसे हुआ कमियों का खुलासा
भाखड़ा बांध की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही कोलर स्थित फर्स्ट आईआरबी ने हाल ही में मॉक ड्रिल की, जिसमें खामियों का खुलासा हुआ है। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक बटालियन ने बाकायदा बीबीएमबी को एक पत्र लिख कर सुरक्षा और चौकसी उपकरण बढ़ाने को आगाह किया है। मॉक ड्रिल में नंगल पुलिस और आईबी के अधिकारी भी थे।
उधर, कोलर स्थित छठी आईआरबी के डीएसपी राजीव अत्री ने बताया कि नंगल से लेकर भाखड़ा डैम तक चिह्नित स्थानों पर करीब 50 सीसीटीवी कैमरे, जरूरी सुरक्षा उपकरण, बूम बैरियर, दूरबीन और डैम में ड्यूटी पर जाने वाले समस्त कर्मियों को आईडी कार्ड जारी करने की सिफारिश की है।
प्रबंधन दे रहा ये सफाई
'आईआरबी भाखड़ा डैम की सुरक्षा को गंभीर है। बीबीएमबी को समय-समय पर इस तरह के सुझाव दिए जाते हैं। इस बार भी चौकसी बढ़ाने के प्रति आगाह किया है।' - बिंदु सचदेवा, प्रथम इंडियन रिजर्व बटालियन की कमांडेंट
'प्रबंधन डैम की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। अगर चौकसी बढ़ाने की जरूरत है तो इस मामले में डायरेक्टर सिक्योरिटी से बात की जाएगी। डैम की सुरक्षा का पूरा प्रभार चंडीगढ़ स्थित निदेशक देखते हैं।' - एके बाली, बीबीएमबी के मुख्य अभियंता इंजीनियर