राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर की सुरक्षा पर सालाना तीन करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद दो साल के भीतर चार निजी सिक्योरिटी कंपनियों के बदले जाने से संस्थान एक बार फिर चर्चा में है। सिक्योरिटी कंपनियों के मामले ने भी तूल पकड़ लिया। सिक्योरिटी कंपनियों के सेवाकर (सर्विस चार्ज) की दरों में उतार-चढ़ाव के कारण एनआईटी हमीरपुर के सुरक्षा इंतजामों में उथल-पुथल मची है।
एक कंपनी ने टेंडर हासिल करने के बाद बीच में काम छोड़ दिया, तो दूसरी ने भी टेंडर हासिल करने के बाद अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। संस्थान हर साल टेंडर जारी करता है। इस बार भी संस्थान ने 18 मार्च तक सिक्योरिटी के लिए टेंडर अवार्ड किए हैं, लेकिन न्यूनतम सेवाकर 2 फीसदी और टीडीएस 2 फीसदी कुल 4 फीसदी तय किया है। इससे प्रदेश पूर्व सैनिक निगम जैसे सरकारी उपक्रम सहित कई कंपनियां टेंडर में हिस्सा लेने से कतरा रही हैं।
एनआईटी में किसने कितने सर्विस चार्ज पर दी सेवाएं
वर्ष 2011 से 2013 के बीच शिमला क्लीनवेज एंड सिक्योरिटी कंपनी ने .04 फीसदी सेवाकर पर टेंडर हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2013 से 2019 करीब छह साल तक सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज कंपनी ने 10 फीसदी सेवाकर पर सेवाएं दीं। वर्ष 2019 में निशा इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी कंपनी ने 3.27 फीसदी न्यूनतम सेवाकर पर टेंडर हासिल किया, लेकिन बीच में ही काम छोड़ दिया।
वर्ष 2019-2020 में सेंट्रल इंवेस्टिगेशन एंड सिक्योरिटी कंपनी ने 4.9 फीसदी सेवाकर पर एक वर्ष की समयावधि के लिए काम हासिल किया। इसी बीच एनआईटी ने सितंबर 2020 को फिर से सिक्योरिटी के टेंडर आमंत्रित किए। जिसमें 9 विभिन्न कंपनियों ने भाग लिया, जिसमें मैसर्ज गुड ईयर सिक्योरिटी सर्विसेज ने टेंडर हासिल किया। लेकिन कंपनी अनुबंध पत्र पर कंपनी ने हस्ताक्षर नहीं किए।
एनआईटी के रजिस्ट्रार प्रो. योगेश गुप्ता ने कहा कि सितंबर 2020 में जिस सिक्योरिटी कंपनी को टेंडर अवार्ड हुआ था, उसने किन्हीं कारणों से अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। जिसके चलते पुरानी कंपनी को एक्सटेंशन दी गई है। नए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।