हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आपराधिक मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को उपयुक्त प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का कहना है कि प्रशिक्षण मिलने से किसी भी आपराधिक मामले की सच्चाई पूरी तरह से कोर्ट के सामने आएगी और असली गुनहगार को सजा मिल सकेगी। इससे सजा की दर में भी बढ़ोतरी होगी और न्याय व्यवस्था का असली मकसद भी पूरा होगा।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी व न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने उपरोक्त आदेश पारित किए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में अनौपचारिक जांच के चलते बेगुनाहों को सजा हो जाती है और असली गुनहगार सरेआम छूट जाते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर प्रदेश सरकार के पास इन अधिकारियों व कर्मियों को ट्रेनिंग देने के लिए उपयुक्त स्थान का अभाव है तो पुलिस विभाग इस बाबत हिमाचल प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी से सहयोग की मांग सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पिछले कुछ वर्षों से आपराधिक मामले की जांच को लेकर बहुत सारी खामियां सामने आ रही हैं। जिसके चलते विभाग को उपयुक्त कदम उठाने चाहिए ताकि कोर्ट के समक्ष सच्चाई आ सके और जो सच नही है, उसे कोर्ट के समक्ष पेश न किया जाए। कोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े आपराधिक मामले में 12 वर्षों की सजा काट रहे व्यक्ति को रिहा करते हुए उपरोक्त निर्देश जारी किए।