पूर्व मुख्य सचिव एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा
धारा 118 के तहत गैर कृषकों को हिमाचल में जमीन खरीदने की अनुमति देने के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामले में सत्र न्यायालय में पूर्व मुख्य सचिव एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा पेश हुए। मित्रा ने विजिलेंस ब्यूरो के पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की मांग पर खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मित्रा की इस दलील को खारिज करते हुए 5 नवंबर को लिखित जवाब देने को कहा है। मित्रा के जवाब के बाद कोर्ट टेस्ट कराने को लेकर अंतिम फैसला दे सकती है।
बता दें कि पिछले नौ साल से मामले की जांच कर रही विजिलेंस ने पूर्व सरकार के अंतिम वर्ष के दौरान इस केस को बंद करने की सिफारिश की थी। कोर्ट ने तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए दोबारा जांच के निर्देश दे दिए। इसके बाद जांच शुरू हुई और वर्तमान अधिकारियों ने फोन रिकॉर्डिंग की तफ्तीश कर कई मामलों में पैसे लेने की बात पकड़ ली। उन्हें पिछली सुनवाई में कोर्ट में पेश किया था। बताया कि विजिलेंस की जांच में कई अन्य मामलों में भी पैसों के लेन-देन की बात सामने आई है। ऐसे में जांच अधिकारियों ने उनके पॉलीग्राफी टेस्ट की मांग की है, ताकि और नए तथ्य सामने लाए जा सकें।