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स्वतंत्रता सेनानी यशपाल के घर और जमीन की तलाश शुरू, जागा प्रशासन

Wed, 04 Dec 2019 11:31 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
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- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल का गौरव और देश की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, भगत सिंह और चंद्रशेखर के साथी रहे महान क्रांतिकारी एवं लेखक यशपाल के पैतृक घर और जमीन की तलाश शुरू हो गई है। उर्दू के जानकार से सौ साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड व जमाबंदियों की जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिलाधीश हमीरपुर ने इस मामले में एसडीएम स्तर के अधिकारी से मामले की तफ्तीश की बात कही है। उन्होंने जिला राजस्व अधिकारी और तहसीलदार को भी इस मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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अमर उजाला ने 3 दिसंबर 2019 के अंक में ‘हिमाचल के गौरव यशपाल की जमीन पर कब्जा’ शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। हमीरपुर के उपायुक्त हरीकेश मीणा ने बताया कि महान क्रांतिकारी यशपाल के पुत्र को उनकी पूर्वजों की जमीन हर सूरत में मिलेगी। इस संदर्भ में एसडीएम, जिला राजस्व अधिकारी से लेकर तहसीलदार को उचित कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अगर राजस्व रिकॉर्ड उर्दू में भी है तो भी उसे खंगाला जाएगा और हमीरपुर जिला में जहां पर भी उनकी जमीन निकलेगी, वह उनके नाम होगी।

खबर छपने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस मामले में सरकार ने भी प्रशासन को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यशपाल के माता-पिता का परिवार और उनके पूर्वज हमीरपुर जिला के भूंपल गांव के वासी थे। उनके दादा गरडू राम विभिन्न स्थानों पर व्यापार करते तथा भोरंज तहसील में टिक्कर भरियां व खर्वारियां के खेतिहर और निवासी थे। पिता हीरालाल दुकानदार तथा तहसील के हरकारे थे। वे जिला महासू के अंतर्गत रियासत अर्की के चांदपुर ग्राम से हमीरपुर में शिफ्ट हुए थे। वर्ष 1937 में यशपाल को जेल से मुक्त तो कर दिया गया।

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‘स्वतंत्रता सेनानी की जमीन पर कब्जा निंदनीय’ 

 लेकिन उनके पंजाब प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लखनऊ जेल से रिहाई के बाद यशपाल ने संयुक्त प्रांत की राजधानी लखनऊ में ही बस जाने का निर्णय ले लिया था। यशपाल का निधन 26 दिसंबर 1976 को अपने संस्मरणों सिंहावलोकन का चौथा भाग लिखते समय हुआ था। नादौन में यशपाल साहित्य सदन और पुस्तकालय है। यहां पर यशपाल के नाम से चौक पर प्रतिमा भी स्थापित है। कहानीकार व उपन्यासकार यशपाल को भारत सरकार ने वर्ष 1970 में पद्मभूषण से नवाजा। सरकार ने यशपाल की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया है। 


महान स्वतंत्रता सेनानी एवं हमीरपुर के गौरव यशपाल की जमीन पर लाल लकीर और अवैध कब्जा करने वालों की हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण संघ ने घोर निंदा की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष पुरुशोत्तम कालिया ने कहा है कि ऐसे महान व्यक्ति की जमीन पर इस तरह का होना सभी के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी यशपाल हिमाचल की शान हैं और उनके बेटे को राजस्व रिकार्ड मिलना चाहिए। संघ का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही इस मामले में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपेगा। 
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