लेकिन उनके पंजाब प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लखनऊ जेल से रिहाई के बाद यशपाल ने संयुक्त प्रांत की राजधानी लखनऊ में ही बस जाने का निर्णय ले लिया था। यशपाल का निधन 26 दिसंबर 1976 को अपने संस्मरणों सिंहावलोकन का चौथा भाग लिखते समय हुआ था। नादौन में यशपाल साहित्य सदन और पुस्तकालय है। यहां पर यशपाल के नाम से चौक पर प्रतिमा भी स्थापित है। कहानीकार व उपन्यासकार यशपाल को भारत सरकार ने वर्ष 1970 में पद्मभूषण से नवाजा। सरकार ने यशपाल की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया है।
महान स्वतंत्रता सेनानी एवं हमीरपुर के गौरव यशपाल की जमीन पर लाल लकीर और अवैध कब्जा करने वालों की हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण संघ ने घोर निंदा की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष पुरुशोत्तम कालिया ने कहा है कि ऐसे महान व्यक्ति की जमीन पर इस तरह का होना सभी के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी यशपाल हिमाचल की शान हैं और उनके बेटे को राजस्व रिकार्ड मिलना चाहिए। संघ का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही इस मामले में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपेगा।