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Shimla News: जंगली आड़ू की प्रजाति को विकसित करेंगे वैज्ञानिक

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बर्फ वाले क्षेत्रों में घास की कमी दूर करने के लिए होगा शोध, कार्यशाला में की गई चर्चा
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अनुमोदन के लिए वानिकी अनुसंधान देहरादून भेजे जाएंगे प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश में पाए जाने वाले जंगली आड़ू को विकसित करने और बर्फ वाले क्षेत्रों में घास की कमी दूर करने के लिए वैज्ञानिक जल्द शोध शुरू करेंगे।

यह जानकारी हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी में अनुसंधान सलाहकार समूह की कार्यशाला दी। इसके अलावा फलों में लगने वाले कीटों को खत्म करने पर भी चर्चा हुई। इसमें वानिकी क्षेत्र की विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञों ने सुझाव दिए। बैठक में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के वानिकी अनुसंधान को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से चर्चा हुई। प्रस्तावित शोध परियोजनाओं को अनुमोदन के लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून भेजने का फैसला लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वह नए परियोजना प्रस्तावों में अपने सुझाव दें ताकि इन परियोजनाओं की व्यावहारिकता बढ़ाई जा सके। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरके वर्मा ने संस्थान की उपलब्धियों और वर्तमान में चल रही परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।
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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून के सहायक महानिदेशक डॉ. पीएस रावत ने बताया कि परियोजना प्रस्तावों में विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल कर उनकी गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा। बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वैज्ञानिक, वन विभाग के अधिकारी, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
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बैठक में यह प्रस्ताव किए पेश
बैठक में संस्थान के वैज्ञानिकों ने 6 नई अनुसंधान परियोजनाओं को प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं में हिमालय के शीत मरुस्थल क्षेत्रों में कीटों की निगरानी और प्रबंधन, प्रदेश में जंगली-आड़ू के मूल्यांकन और संरक्षण, लद्दाख में चारे की मांग को पूरा करने के लिए सिल्वी-पास्टोरल प्रणाली का विकास, सैलिक्स प्रजातियों का मूल्यांकन और सैंज खड्ड वाटरशेड में पौध विविधता का आकलन करना शामिल रहा।


दाड़ू को बनाएंगे कमाई का जरिया
सिरमौर के पर्वतीय जन शिक्षा एवं विकास संगठन के प्रतिनिधि प्रभु दयाल शर्मा ने दाड़ू के अनारदाना पर शोध करने और इसे सुरक्षित रखने के लिए नई परियोजना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अनारदाना के सुरक्षित भंडारण और सुखाने के तरीकों की आवश्यकता जताई। अनारदाना प्रदेश में उगने वाले महत्वपूर्ण जंगली प्रजातियों में से एक है। दाड़ू लगभग हर जिले में पाया जाता है लेकिन इसकी व्यवसायिक खेती नहीं होती। जंगलों में उग रहे पेड़ों से ही फल तोड़कर उनसे अनारदाना निकाला जाता है। शोध से व्यावसायिक स्तर पर दाड़ू की खेती करने में मदद मिलेगी जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
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