बताया जा रहा है कि जिले में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पर बच्चों से मिड-डे मील के राशन की ढुलाई करवाई जाती है। उधर, भरी गर्मी में सामान ढुलाई जैसी गतिविधियों में बच्चों से काम लेने की सूचनाओं से अभिभावक भी चिंतित हैं। विद्यालय के हेडमास्टर सुरेंद्र मोहन का कहना है कि विद्यालय में दो मिड डे मील वर्कर तैनात हैं।
इसके बावजूद बच्चों को राशन लाने के लिए भेजे जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। वहीं, बीईईओ (ब्लॉक एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर) शेर सिंह ने बताया कि स्कूलों में राशन ढुलाई के लिए अलग से बजट का प्रावधान होता है। यदि बच्चों से राशन ढुलाई कराने जैसी कोई बात हुई है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।