प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगाें का कहना है कि जिन कॉलेजों पर छापे पड़े, उनके आसपास के कॉलेज दुष्प्रचार कर प्रवेश प्रक्रिया को और प्रभावित कर रहे हैं। आधिकारिक तौर पर निदेशालय के अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि संस्थान को छात्रवृत्ति वाले प्रवेश लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
फिर भी अगर शिकयत आती है तो कॉलेज को नोटिस देकर जवाब तलब किया जा सकता है। वहीं, प्राइवेट टेक्निकल कॉलेज एसोसिएशन का कहना है कि चूंकि छात्रवृत्ति की वजह से ही कॉलेजों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है। ऐसे में कॉलेज भी विवादों से बचने के लिए सामान्य एडमिशन पर ही जोर दे रहे हैं।