सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। निचले स्तर के अधिकारी- कर्मचारी फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे। जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत निजी ई-मेल आईडी से छात्रवृत्ति के काम को अंजाम दिया जाता था।
स्कॉलरशिप इंचार्ज के विजटिंग कार्ड तक बनाए
सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि कई अफसरों- कर्मचारियों ने निजी शिक्षण संस्थानों पर प्रभाव डालने के लिए बाकायदा विजटिंग कार्ड बनाए थे जिसमें खुद को स्कॉलरशिप का इंचार्ज बताया गया था।
अधिकारियों को धमकाने का आरोप
सीबीआई के मुताबिक स्कॉलरशिप जारी करने की प्रक्रिया अधीक्षक ग्रेड-1 के पास होती है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक कई तत्कालीन अधीक्षकों ने पूछताछ में बताया है कि उन्हें स्कॉलरशिप तय मानकों की जांच के बगैर जारी करने को लेकर धमकाया जाता था। यही नहीं ऐसा न करने पर कई अधिकारियों का तबादला तक कर दिया जाता था।
उच्च शिक्षा निदेशालय की छात्रवृत्ति शाखा में काम कर चुके कई मुलाजिमों से सीबीआई ने पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है। पूछताछ के लिए सीबीआई द्वारा किए गए आवेदन को प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है।
शिक्षा विभाग के अधीक्षक अरविंद राज्टा से पूछताछ के बाद अब कई अधिकारियों और कर्मचारियों से भी सीबीआई पड़ताल करेगी। शिक्षा विभाग में 250 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने छात्रवृत्ति शाखा में नियुक्त सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले कर दिए थे।
इनमें से कई सेवानिवृत्त हो गए हैं तो कुछ स्कूलों और जिला कार्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई की शिमला में बीते रोज हुई छापेमारी से उच्च शिक्षा निदेशालय में हड़कंप मचा है।