शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ अफसरों की मिलीभगत से अस्सी फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ निजी संस्थानों में बांटा गया, सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति बजट की मात्र 20 फीसदी राशि ही मिली।
निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। 19,915 विद्यार्थियों को एक ही मोबाइल नंबर वाले बैंक खाते में छात्रवृत्ति राशि जारी हुई है। 360 छात्रों का बैंक खाता नंबर भी एक समान है। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।
साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक किसी भी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 से शिक्षा निदेशालय ने छात्रवृत्ति राशि के आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों को तरजीह दी। सरकारी संस्थानों के आवेदन आने के बावजूद पहले निजी संस्थानों के आवेदन वेबसाइट पर अपलोड किए गए।