करोड़ों के कथित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच शिमला पुलिस के गले की फांस बन गई है। जिन निजी शिक्षण संस्थानों को जांच के दायरे में लाया गया है, वे संस्थान प्रदेश के कई जिलों में हैं। जांच का दायरा पूरे प्रदेश में होने की वजह से स्थानीय पुलिस छानबीन को गति नहीं दे पा रही है।
हालांकि, राज्य सरकार ने इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द करने का फैसला लिया है लेकिन कई महीने बीत जाने पर भी सीबीआई ने अब तक यह मामला अपने हाथ में नहीं लिया है। इस स्थिति में शिमला पुलिस को यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि शुरुआती जांच करने के बाद अब वह इस मामले के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाए या मामला स्टेट सीआईडी के सुपुर्द करने के लिए प्रदेश पुलिस मुख्यालय को लिखे।
शिमला पुलिस ने इस मामले में शिक्षा महकमे के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं और शक के दायरे में आए निजी शिक्षण संस्थानों को भी रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा है। बावजूद इसके अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि असल में कितने का घोटाला हुआ है।
ऐसे सामने आया मामला
हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच की। इसमें प्रदेश के कई इलाकों में फ र्जी दाखिले से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटाले की बात सामने आई। घोटाले की राशि करीब 250 करोड़ बताई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीबीआई से जांच करने की सिफ ारिश की थी।
25 से ज्यादा शिक्षण संस्थान शक के घेरे में
केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में घोटाला होने के मामले की प्रारंभिक जांच में सूबे के 25 से अधिक निजी शिक्षण संस्थान शक के घेरे में हैं। छात्रवृत्ति पोर्टल बनवाने वाले अफ सर भी संदेह के घेरे में हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय में गठित जांच कमेटी के सदस्यों के मुताबिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपीई पास पोर्टल में कई तरह की खामियां मिली हैं। इन खामियों का लाभ उठाते हुए ही कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी दाखिले दिखाकर छात्रों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले और सरकारी धनराशि हड़पी है।