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ऊना के पंडोगा से पंजाब के नवांशहर तक जुड़े हैं छात्रवृत्ति घोटाले के तार

Sun, 05 Jan 2020 01:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
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scholarship scam in Himachal Pradesh
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250 करोड़ से अधिक राशि के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले के तार ऊना के पंडोगा से पंजाब के नवांशहर तक जुड़े होने के पुख्ता सुबूत हाथ लगने के बाद ही सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तारियां की हैं। केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन पंडोगा को नियमों के खिलाफ 13 करोड़ की छात्रवृत्ति जारी हुई। इसी संस्थान के वाइस चेयरमैन और नवांशहर बैंक शाखा के कैशियर की शिक्षा निदेशालय के अधीक्षक से मिलीभगत के चलते घोटाले को अंजाम दिया गया।

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पंडोगा के संस्थान में दाखिल विद्यार्थियों के बैंक खाते नवांशहर में खोले गए। इस संस्थान की नवांशहर में भी एक शाखा है। ऐसे में निजी प्रबंधन ने बैंक और शिक्षा विभाग के अधिकारी से मिलकर घोटाले को अंजाम दिया। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य कई बड़े निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों पर सीबीआई का शिकंजा कसेगा।

उच्च शिक्षा निदेशालय से साल 2013-14 से 2016-17 तक मात्र छह निजी संस्थानों को 127 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि जारी हुई है। सरकारी अफसरों की मिलीभगत से 266 निजी संस्थानों को कुल छात्रवृत्ति राशि का 80 फीसदी बजट दिया गया। चार सालों में सबसे अधिक आईटीएफटी चंडीगढ़ को 39 करोड़ और दूसरे नंबर पर हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट कालाअंब को 35 करोड़ जारी किए गए।
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इसके अलावा विद्या ज्योति ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन को 15 करोड़, केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन पंडोगा को 13 करोड़, केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन नवांशहर को 12 करोड़ और सुखविंद्र ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन दूनेरा को 10 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई। जबकि 2506 सरकारी व निजी संस्थानों को सिर्फ 20 फीसदी छात्रवृत्ति बजट ही दिया गया।

साल 2013-14 से 2016-17 तक उच्च शिक्षा निदेशालय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के हिमाचली विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले संस्थानों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बजट जारी करता रहा है। करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले इन निजी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के आवेदनों की इन चार साल के दौरान एक बार भी जांच नहीं की गई।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर दस्तावेज जांचने की जहमत तक नहीं उठाई। शिमला में बैठे अफसरों की मिलीभगत से सारा खेल चलता रहा। अब गिरफ्तारियां शुरू होने से 250 करोड़ के घोटाले की कई परतें खुलेंगी।

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