इससे सरकारी कोष को नुकसान पहुंचने की बात की गई। वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई यह जांच बेनतीजा ही रही थी। इस पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकी थी। सूत्रों ने बताया कि इस मामले को बंद करने के आदेश के साथ ही तमाम संबंधित अधिकारियों से इस पर ओपिनियन मांगा गया है, जिसके बाद इसे बंद कर दिया जाएगा।
जयराम सरकार की अनुमति के बाद एक सरकारी वकील की ओर डॉ. राजीव बिंदल के खिलाफ भर्ती अनियमितताओं के मामले को भी राजनीतिक रंजिश से प्रेरित हुआ मानकर इसे वापस लेने की अर्जी कोर्ट में दी जा चुकी है।
इस मामले को वापस लेने के लिए पहले ही कोर्ट में अरजी दी जा चुकी है। वीरभद्र सरकार ने एक दशक पहले डॉ. बिंदल पर मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप थे कि जब वह नगर परिषद सोलन के अध्यक्ष थे तो भर्ती में अनियमितताएं हुईं।