भाजपा में पत्र बम पर सियायत और गरमा गई है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने पत्र बम को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जो निर्णय लिया है, उससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। किसी भी व्यक्ति के पास अगर तथ्य हैं तो सरकार उस पर जांच कराने को तैयार है। मुकेश अग्निहोत्री को लेकर भी शिमला में बेनामी पत्र बांटे गए थे, 1998 में जब प्रो. प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे तब भी उनके मंत्री प्रवीण शर्मा के बारे में बेनामी पत्र आए थे, तब तो प्रवीण शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, पर उनका इस्तीफा नहीं लिया गया।
सत्ती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि ऐसे तो बेनामी पत्र किसी भी मंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ आ सकते हैं तो क्या सब ही इस्तीफा दे देंगे, जब वीरभद्र सिंह भी मुख्यमंत्री थे तब उनके मंत्री जीएस बाली के खिलाफ भी बेनामी पत्र आए थे तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी इस्तीफा मंजूर नहीं किया था। पत्रों को लेकर कोई भी संज्ञान आज तक नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की चिट्टियां लिखा करते हैं उनको पुलिस की ओर से ढूंढा जाएगा और उनसे बातचीत की जाएगी। विधानसभा में भी ऐसे बेनामी पत्रों को लेकर कई बार चर्चा हो चुकी है। इन पत्रों को लेकर निर्णय भी लिए गए हैं।