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सतलुज वाटर प्रोजेक्ट को मिल गई फॅारेस्ट क्लीयरेंस

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केंद्रीय वन मंत्रालय ने दी हरी झंडी, 12.24 हेक्टेयर वन भूमि का होगा इस्तेमाल
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पेयजल लाइन बिछाने के लिए कटेंगे 1364 पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा
मुहैया करवाने के लिए तैयार किए सतलुज वाटर प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार के वन मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को फॉरेस्ट क्लीयरेंस दे दी है।
पेयजल कंपनी को वीरवार इसकी लिखित मंजूरी मिली। अब इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए वन भूमि का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पंपिंग स्टेशन बनाने और पेयजल लाइन बिछाने के लिए 12.24 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल किया जाना है। यह वन भूमि अब पेयजल कंपनी के हवाले की जाएगी। प्रोजेक्ट का काम पूरा करने के लिए 1364 पेड़ काटे जाएंगे। फॉरेस्ट क्लीयरेंस न होने से पेयजल कंपनी कई महीने से इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पा रही थी।
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कंपनी ने एफसीए के तहत इसकी रिपोर्ट तैयार कर मंजूरी के लिए भेजी थी। इस पर बीते महीने केंद्रीय वन मंत्रालय के शिमला स्थित कार्यालय के अधिकारियों ने पेयजल कंपनी और वन विभाग के अधिकारियों के साथ सर्वेक्षण किया था। सर्वे के बाद रिपोर्ट दी गई कि प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए कुल 12.24 वन भूमि का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें कुल 1364 पेड़ों को काटने की जरूरत पड़ेगी। इसकी रिपोर्ट मंजूरी के लिए वन मंत्रालय के देहरादून केंद्र भेजी थी जिस पर अब मंजूरी मिल गई है।
सतलुज के पानी से शहर
में खत्म होगा जलसंकट
विश्व बैंक के इस प्रोजेक्ट के तहत सुन्नी के शकरोड़ी गांव से सतलुज का पानी शिमला के लिए लिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए कुल 22 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन बिछेगी और तीन पंपिंग स्टेशन बनेंगे। यह पानी संजौली टैंक में पहुंचेगा। रोजाना शिमला शहर को 67 एमएलडी पानी मिलेगा जिससे लोगों को 24 घंटे सप्लाई दी जाएगी। लोगों को घर की छत पर टंकियां रखने की जरूरत नहीं रहेगा। शिमला शहर के अलावा प्लानिंग एरिया में भी पानी दिया जाएगा।
पहला प्रोजेक्ट, जिसे इतनी जल्दी मिली मंजूरी
यह राजधानी का पहला प्रोजेक्ट है जिसे एक साल से भी कम समय के भीतर फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिल गई। शहर में स्मार्ट सिटी और नगर निगम समेत कई महकमों के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बीते कई साल से मंजूरी के लिए लटके पड़े हैं। पेयजल कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल और एजीएम राजेश कश्यप के प्रयासों से शहर का यह मेगा प्रोजेक्ट अब सिरे चढ़ सकेगा। यह वन भूमि कुछ शर्तों के साथ कंपनी को मिलेगी। इसमें वन भूमि की विधिक स्थिति अपरिवर्तित रहेगी और इसके इस्तेमाल के एवज में इस क्षेत्र में पौधरोपण करना होगा। यह भूमि की दूसरे काम के लिए इस्तेमाल नहीं होगी। इसे दूसरे महकमे या एजेंसी को भी ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
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आंकड़ों की नजर में प्रोजेक्ट
शहर को मिलेगा 67 एमएलडी पानी, 24 घंटे मिलेगी सप्लाई
शकरोड़ी से शिमला तक बिछेगी 22 किमी लंबी पेयजल लाइन
डेढ़ साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट, कटेंगे 1364 छोटे बड़े पेड़
मिल गई है मंजूरी : एजीएम
प्रोजेक्ट के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस आ गई है। यह अच्छी खबर है। अब जल्द इसका काम शुरू हो पाएगा। प्रयास रहेगा कि जल्द काम पूरा कर शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल की सुविधा दी जाए।
-धर्मेंद्र गिल, एमडी पेयजल कंपनी
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