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संयुक्त किसान मंच: नीतिगत फैसलों के लिए बागवानों के साथ मुख्यमंत्री करें बैठक

Sun, 12 Feb 2023 09:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

संयुक्त किसान मंच के नेताओं ने दो टूक कहा कि किसानों- बागवानों की अनदेखी से ही भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। किसानों ने सेब उत्पादक क्षेत्रों की 17 में से 14 विधानसभा सीटें कांग्रेस की झोली में डाली हैं।
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संयुक्त किसान मंच अध्यक्ष व उपाध्यक्ष। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसान-बागवानों के प्रदेश के सबसे बड़े संगठन संयुक्त किसान मंच ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने की मांग उठाई है, जिससे नीतिगत फैसले लेकर इन्हें लागू किया जा सके। मंच ने विभागीय बैठकों को रस्म अदायगी करार दिया है और इन बैठकों से किसानों-बागवानों की राहत पर आशंका जताई है। मंगलवार को बागवानी सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक से पहले संयुक्त किसान मंच मुखर हो गया है।

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मंच के नेताओं ने दो टूक कहा है कि किसानों- बागवानों की अनदेखी से ही भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। किसानों ने सेब उत्पादक क्षेत्रों की 17 में से 14 विधानसभा सीटें कांग्रेस की झोली में डाली हैं। कांग्रेस को भी किसान-बागवानों को गंभीरता से लेना चाहिए। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि 21 जनवरी को मंच ने मुख्यमंत्री को 20 सूत्री मांगपत्र भेजकर बागवानों के साथ बैठक आयोजित करने की मांग उठाई थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने जवाब में जल्द बैठक करने की सूचना दी थी। बीते साल संयुक्त किसान मंच के आंदोलन को मौजूदा सरकार के मंत्री रोहित ठाकुर और विक्रमादित्य सिंह, विधायक हरीश जनारथा, सीपीएस मोहन लाल ब्राक्टा ने समर्थन दिया था। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में भी मंच की मांगों को प्रमुखता से उठाया। सरकार बनाने के बाद अब किसान बागवान संकट के समय में सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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बागवानी सचिव की अध्यक्षता में होगी बैठक : कदम
मंगलवार को बागवान संघों के साथ बागवानी सचिव की अध्यक्षता में बैठक होगी। बागवानी सचिव बागवानों की मांगों से सरकार को अवगत करवाएंगे और सरकार के स्तर पर मांगों का समाधान होगा। - संदीप कदम, निदेशक, बागवानी विभाग

संयुक्त किसान मंच की प्रमुख मांगें
मंडियों में किलो के हिसाब से सेब खरीद की व्यवस्था हो, एपीएमसी कानून सख्ती से लागू किया जाए, खाद, बीज, कीटनाशकों पर अनुदान बहाल किया जाए, बैरियरों पर मार्केट फीस की वसूली बंद हो, कृषि बागवानी सहायक उपकरणों पर अनुदान बहाल हो, बागवानी बोर्ड का गठन किया जाए, सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हों, फलों सब्जियों की पैकिंग सामग्री से जीएसटी हटाया जाए, कश्मीर की तर्ज पर मंडी मध्यस्थता योजना के तहत ए, बी,सी ग्रेड सेब क्रमश: 60, 44 और 24 रुपये खरीदा जाए।

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