सीटू राज्य कमेटी ने कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने, तबादले करने की निंदा की है। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने सरकार की कार्रवाई को तानाशाही करार दिया है। उन्होंने चेताया है अगर कर्मचारियों के उत्पीड़न पर रोक न लगी तो प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने पद की गरिमा का ध्यान रखें। वे कर्मचारियों की पेंशन बहाली के बजाए चुनाव लड़कर पेंशन हासिल करने की संवेदनहीन बात कह रहे हैं। मुख्यमंत्री और सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और नवउदारवादी नीतियों को कर्मचारियों और आम जनता पर थोप रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि वर्ष 1992 में इसी तरीके की कर्मचारी विरोधी बयानबाजी, वेतन कटौती जैसे काम तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार ने किया था। उन्होंने कर्मचारियों पर तानाशाही नो वर्क नो पे लागू किया था। उस सरकार का हश्र सबको मालूम है। शांता कुमार दोबारा शिमला में मुख्यमंत्री के रूप में कभी वापसी नहीं कर पाए। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग, छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने और आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने की बात की मुख्यमंत्री खिल्ली उड़ा रहे हैं।