हिमाचल प्रदेश के राज्य सचिवालय में कोविड के शुरुआती दौर में हुए सैनिटाइजर घोटाले की तफ्तीश करने वाली विजिलेंस पिछले छह महीने से जांच पूरी करने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। कारण, ब्यूरो ने सचिवालय में तैनात संयुक्त सचिव पुष्पलता सिंघा के खिलाफ जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर प्रदेश सरकार से अभियोजन मंजूरी मांगी थी।
सरकार ने मामले में फंसे तीन अन्य कर्मचारियों की तो मंजूरी ब्यूरो को दे दी, लेकिन सिंघा के मामले में न तो मंजूरी दी है और न ही मंजूरी देने से इंकार किया है। मंजूरी पर जवाब न आने की वजह से चार्जशीट में सिंघा का नाम शामिल करने या न करने पर फैसला नहीं हो पा रहा। ऐसे में ब्यूरो भी सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहा है।
खास बात यह है कि यह वही घोटाला है जिसकी जांच जयराम सरकार ने ही विजिलेंस ब्यूरो को दी थी। इसी मामले में भाजपा के एक नेता और ठेकेदार का भी नाम आया था। ब्यूरो ने मामले की जांच को छह महीने में पूरा कर लिया और चार्जशीट भी तैयार कर ली, लेकिन सरकार पिछले छह महीने से इस अभियोजन मंजूरी पर फैसला नहीं ले पाई है। यह तब है जब प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है।