झाड़माजरी स्थित एक फार्मा इकाई की एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट और एस्से परीक्षण में असफल पाई गई, जबकि सेफिक्सिम डिस्पर्सिबल टैबलेट भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। पशु उपयोग के लिवग्रो इंजेक्शन में सायनोकोबालामिन और राइबोफ्लेविन की गुणवत्ता भी सही नहीं पाई गई है। इसके अलावा पैरासिटामोल पीडियाट्रिक सस्पेंशन के दो बैच भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे बच्चों में उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खांसी, एलर्जी और पाचन संबंधी दवाओं में एम्ब्रोक्सोल-टरब्यूटालिन-गुआइफेनेसिन सिरप, प्रोमेथाजिन सिरप, फिनाइलएफ्रिन-क्लोरफेनिरामिन सिरप तथा मोंटेलुकास्ट-लेवोसेटिरिजिन दवा भी कंटेंट संबंधी परीक्षण में फेल हुई हैं। राज्य ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि फेल होने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। विभाग स्वयं भी इन दवाओं को सैंपल की जांच करेगी। खराब दवाओं के बाजार से स्टाॅक वापस मंगाने को कहा गया है।