सोमवती अमावस्या पर सोमवार को सैकड़ों श्रद्घालुओं ने पवित्र श्री रेणुका झील में स्नान करके मोक्ष प्राप्ति की कामना की। स्नान का सिलसिला सुबह ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हो कर देर शाम तक चलता रहा।
सर्व प्रथम श्री रेणुका तीर्थ में स्थित संत महात्माओं एवं साधु संतों ने झील में स्नान कर पर्व का शुभारंभ किया। स्नान के बाद सभी श्रद्घालुओं ने पवित्र श्री रेणुका झील की परिक्रमा करके भगवान परशुराम एवं श्री रेणुका माता मंदिर में पूजा अर्चना भी की।
इस दौरान भक्तों से देवताओं से सुख-समृद्घि की कामना भी की। सोमवती अमावस्या पर श्री रेणुका झील में स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है।
झील में स्नान करने से जहां मनोकामना की पूर्ति होती है वहीं दुख एवं पाप का निवारण भी होता है। स्नान की महता को लेकर रेणुका विकास बोर्ड ने भी व्यवस्थाओं को सजग बनाया हुआ था।
श्री रेणुका में स्थित निर्वाण आश्रम, संन्यास आश्रम के अलावा ब्रह्मचर्य आश्रमों में विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ।