गदर फिल्म का हुक्का टेलीफोन हो या फिर 70 के दशक में संगीत सुनने का साधन ग्रामोफोन...। राजधानी शिमला में आज भी ऐसी एंटीक वस्तुएं सड़कों पर बिक रही हैं। शहर के लोग ही नहीं बल्कि देश और विदेश से आने वाले सैलानी इन एंटीक वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।
ईदगाह कालोनी में रहने वाले मोहम्मद जमील सिद्दीकी 40 सालों से शिमला में एंटीक वस्तुओं का कारोबार कर रहे हैं। लोअर बाजार में नत्थू हलवाई की दुकान के सामने जमील अपनी दुकान सजाते हैं। एंटीक वस्तुओं का कारोबार जमील का खानदानी पेशा है। पिता भी यही काम करते थे और बेटा भी वकालत की पढ़ाई के साथ-साथ यह काम कर रहा है।
जमील का कहना है कि एंटीक चीजें पसंद करने वाले लोगों का समाज में एक अलग वर्ग है। नवाबों के जमाने की सुराही से लेकर अंग्रेजों के जमाने की दूरबीन तक उनके पास बेचने के लिए है। मुरादाबाद, अलीगढ़, हैदराबाद, सहारनपुर के अलावा कोलकाता, चैन्नई और मद्रास से एंटीक वस्तुएं बिक्री के लिए शिमला पहुंचती हैं। पुराने सिक्के, बंदूकें, ढाल और तलवार, दूरबीनें जमील के पास उपलब्ध हैं।
‘शिमला मिर्ची’ की शूटिंग में इस्तेमाल हुई हैं एंटीक वस्तुएं
बीते दिनों शिमला में रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शिमला मिर्ची’ की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी पर एंटीक वस्तुओं के साथ शॉट फिल्माए गए हैं। एंटीक वस्तुओं के कारोबारी जमील सिद्दीकी के अनुसार उनसे ही शूटिंग यूनिट ने किराये पर ग्रामोफोन और हुक्का टेलीफोन लिया था।
कनाडा से पहुंचे कंपास और रेत घड़ी खरीदने वाले
एंटीक वस्तुएं खरीदने के लिए बीते साल विशेषतौर पर कुछ लोग कनाडा से शिमला पहुंचे। जमील सिद्दीकी ने बताया कि कनाडा से आए लोगों ने कंपास (दिशा सूचक यंत्र) और रेत घड़ी खरीदी थी।