प्रख्यात साहित्यकार गिरिराज किशोर ने कहा कि समाज से जुडे़ बिना सार्थक साहित्य की रचना संभव नहीं है। मंडी में संगमन-20 के समापन पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भले ही चुनौतियों भरा है, लेकिन अंधेरे के बीच भी रास्ते की तलाश करनी होगी।
साहित्यकारों को सचेत किया कि सुविधा और अवसरवाद के सिद्धांत को छोड़ते हुए व्यक्ति और समाज से जुड़ कर सृजन करना होगा। जमीन से संपर्क कटने का मतलब है कि समाज से कटना। संगमन-20 के मूल विषय रचनात्मक अवधारणाओं की चिंताएं पर टिपणी करते हुए गिरिराज किशोर ने कहा कि समाज के लिए सोचने वाले लोगों के सामने कई समस्याएं हैं।
उन्होंने मणिपुर की एरोन शर्मिला और पाकिस्तान की मलाला का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ओर मलाला शिक्षा की बात करती हैं, लेकिन उनके पास इसे लागू करने की कोई योजना नहीं है। उसके पीछे यूरोप खड़ा है। जिसके चलते उसे नोबल पुरस्कार मिल जाता है। एरोमा शर्मिला के पास योजना है। वह पिछले कई सालों से सत्याग्रह भी कर रही हैं, मगर अपने ही लोग उनके साथ नहीं हैं।
गिरिराज किशोर ने कहा कि अब लोगों में आपसी संवाद खत्म हो रहा है। यहां तक लेखन आत्म केंद्रित होकर किया जा रहा है। अपने आप से ऊपर उठकर लिखने की जरूरत है। संगमन में लोग अपने समय पर चिंतन कर रहे हैं। किसी नतीजे तक पहुंचने की आवश्यकता है।
कहा कि गांधी को उनके अपनों ने ही छोड़ दिया है। यहां तक कि नेहरू भी गांधी से नफरत करते थे। अब जिन्होंने गांधी को अपनाया वो भी उनके मूल सिद्धांत अहिंसा के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छता के लिए गांधी को मुखौटा बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वामपंथियों ने किसानों को भूल दिया। जिसके चलते उन्हें सत्ता से दूर रहना पड़ रहा है। दो दिवसीय संगमन-20 के तीन सत्रों में बाहर से आए साहित्यकारों में आनंद प्रधान, सुधीर विद्यार्थी,बसंत त्रिपाठी,आलोक श्री वास्तव,विनोद तिवारी,अजेय, बद्री सिंह भाटिया, मुकेश वर्मा,आशुतोष, राकेश दुबे, मनोज कुमार पांडे,भाषासिंह, हेमलता महेश्वर, वैभव सिंह, संजीव कुमार, वंदना राग,इंद्र ठाकुर, संदीप नील, मिथिलेश प्रियदर्शी, पंकज दीक्षित, मुकेश बिजौले, कमलेश भट्ट कमल, राज कुमार राकेश, अल्पना मिश्र, देवेंद्र, प्रियवंद, सुंदर लोहिया, सुरेश सेन निशांत, हंस राज भारती, निदेश धर्मपाल, कृष्ण चंद्र महादेविया, पवन चौहान, गणेश गनी, हुकुम ठाकुर, विजय विशाल, रेखा, निरंजन देव शर्मा आदि ने चर्चाओं में भाग लिया।
रिवालसर भ्रमण के साथ संगमन का समापन
संगमन-20 में शिरकत करने आए हिंदीपट्टी के साहित्यकारों ने दो दिन तक मंडी में रचनात्मक अवधारणाओं की चिंताओं पर चर्चा करने के पश्चात सोमवार को दोपहर बाद त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर का भ्रमण किया।
मंडी में संगमन-20 के आयोजन को बेहद सफल करार देते हुए गिरिराज किशोर ने कहा कि मंडी नगर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। यहां आना अपने आपमें अनूठा अनुभव रहा है।
वहीं संगमन के संयोजक प्रियवंद और सदस्य अल्पना मिश्र ने कहा कि मंडी की यादों को लेकर अपने साथ लेकर जा रहे हैं।