राजधानी शिमला में सफाई कर्मचारियों की चल रही हड़ताल अब तीन मुद्दों पर आकर अटक गई है। सैहब सोसाइटी के कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनने, वेतन में बढ़ोतरी और हड़ताल के चलते निष्कासित किए कर्मचारियों की बहाली यूनियन मांग रही है। हड़ताली कर्मचारियों और नगर निगम प्रशासन के बीच इन्हीं तीन बातों पर टकराव है।
नगर निगम प्रशासन हड़ताली कर्मचारियों की मांगों को पूरा करना अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बता रहा है। 16 दिन से नगर निगम की सैहब सोसाइटी के सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर हैं। शहर में डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन योजना ठप है। जैसे-जैसे दिन बढ़ रहे हैं शहर की सूरत भी बिगड़ने लगी है। हालांकि हड़ताल के बावजूद नगर निगम प्रशासन ने शहर में सफाई व्यवस्था की स्थिति को बस से बाहर नहीं होने दिया है।
आखिर 16 दिन से चली आ रही हड़ताल कैसे खत्म होगी? दोनों पक्षों की क्या मुख्य मांगें हैं और क्या दलील हैं यह जानने के लिए ‘अमर उजाला’ ने सैहब सोसाइटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रंगीला राम और नगर निगम के सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक से बात की।
मांग 1- सैहब सोसाइटी कर्मियों के लिए बने स्थायी नीति
एमसी का जवाब- सोसाइटी कर्मियों के लिए नीति बनाना सरकार का क्षेत्राधिकार है। सरकार को मामला भेजा जा चुका है। पांच साल का सेवाकाल पूरा कर चुके गारबेज कलेक्टरों को नियुक्त पत्र देने की मांग पर अक्तूबर में होने वाली एनवल जनरल मीटिंग में फैसला लिया जाएगा।
मांग 2- सैहब सोसायटी कर्मचारियों के वेतन में की जाए बढ़ोतरी
एमसी का जवाब- कर्मचारियों का वेतन 10 फीसदी बढ़ा दिया है। हड़ताली कर्मचारियों की मांग के अनुरूप वेतन बढ़ोतरी सोसायटी की क्षमता से बाहर है। यूजर चार्जिज में बढ़ोतरी करके ही वेतन बढ़ाया जा सकता है। यूजर चार्जिज बढ़ना नगर निगम हाउस के क्षेत्राधिकार में है।
मांग 3- निष्कासित कर्मचारियों की सेवाएं बहाल हों, जिन्हें प्रमोशन दी गई है उसे रद किया जाए
एमसी का जवाब- निष्कासित कर्मचारियों के मामले केस टू केस बेस पर जांचे जाएंगे। लिखित आवेदन के बाद कर्मचारियों को उनका पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। प्रमोशन के मामलों में यदि किसी पात्र कर्मचारी के साथ अन्याय हुआ होगा तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाएगी।