सुबह का वक्त। सब्जी मंडी में सब्जियों की बोलियां लग रही हैं। यहां भिंडी 10 रुपये, तोरी 8 रुपये, घिया 5 रुपये, हरी मिर्च 15 रुपये, टमाटर 5 रुपये, पहाड़ी खीरा 25 रुपये, बैंगन 18 रुपये, मूली 8 रुपये और करेला 18 रुपये प्रति किलो के हिसाब से किसानों से खरीदा गया।
लेकिन सब्जी मंडी में जब दुकानें सजी तो भिंडी 20 रुपये, तोरी 20 रुपये, पहाड़ी खीरा 50, करेला 40 , घिया 20, बैंगन 30 और टमाटर 20 रुपये किलो दर से बेचा जाने जगा। यह सब मंडी के भीतर ही हुआ।
यहां न कोई फासला था न ही किसी तरह सब्जियां ढोने का भाड़ा दिया गया। लेकिन रेट सीधे दो से चार गुना हो गए। किसान यहां खुद को लुटा और ठगा महसूस कर रहे हैं। किसानों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अपील की है कि उन्हें उनका वाजिब हक दिलाया जाए।
हरी सब्जियों की कीमतों पर हो रहे खेल में किसान को वाजिब दाम नहीं मिल रहे। उनसे खरीदी हुई सब्जी मंडी के भीतर ही दो से तीन गुना दामों पर बेची जा रही है। किसानों के हाल इतने बेहाल हो चुके हैं कि बीज की कीमत तो दूर सब्जी बेचने के बाद घर लौटने तक का किराया भी जेब में नहीं बचता।
और से किसान की सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। मंडी में उन्हें यह कहकर टरकाया जा रहा है कि सब्जियों के रेट गिर गए हैं। ‘अमर उजाला’ की टीम ने शुक्रवार को लोअर बाजार की सब्जी मंडी में पहुंचकर इस मामले की जांच की। ऐसे में ऊंचे दाम आपको कैसे दिलाएं?
लेकिन वही सब्जी बाहर उपभोक्ताओं को ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। किसानों को पक्के बिल की जगह पर्चियां दी जा रही हैं। इस सारे गोलमाल में किसान और उपभोक्ता पिस कर रह गए हैं।
किसान को महज 90 रुपये मुनाफा- किसान ताराचंद ने बताया कि 22 किलो टमाटर 110 रुपये में और 13 किलो मूली 130 रुपये में बिकी। गांव से यहां आने-जाने का बस और सब्जी का किराया 150 रुपये बैठता है। इसमें अब कुल मुनाफा 90 रुपये बचा है। इतनी मेहनत के बाद 90 रुपये लेकर घर जा रहा हूं।
और चार गुना दाम पर बिकी सब्जियां- घणाहटी के धमून गांव से सब्जी बेचने आए किसान ताराचंद ने कहा कि मई में उन्होंने मूली और टमाटर की फसल लगाई थी। रात दिन मेहनत करके फसल को तैयार किया। फसल को बंदरों और जंगली जानवरों से बचाया।
फसल तैयार हुई तो उसे काटकर यहां बेचने आए। टमाटर पांच रुपये किलो के भाव से बिका और मूली दस रुपये प्रति किलो बिकी। यही सब्जी यहां बाहर दुकानों में दो से चार गुणा अधिक दामों तक बिक रही है।
जगह एक, 500 फीसदी बढ़ गए दाम- हरी सब्जियों के दामों पर बोली लगाने वाले ही पूरा खेल, खेल जाते हैं। बोली लगाने वालों की एकजुटता के आगे दाम आगे नहीं बढ़ पाते और किसान अपने उत्पाद कम रेट पर बेचने को मजबूर हो जाता है।
गांवों से भाड़ा देकर लाई सब्जियों को किसान वापस ले नहीं जा सकता है। लिहाजा किसानों को औने-पौने दामों पर सब्जियां बेचने को मजबूर कर दिया जाता है। हैरत इस बात की है कि लोअर बाजार सब्जी मंडी में एक ही जगह सौ से 500 फीसदी तक सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं।
आढ़ती एसोसिएशन सब्जी मंडी के अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने कहा कि बोली में खरीदी गई सब्जियां कुछ खराब भी निकलती हैं तो कुछ दागी होती हैं। इस वजह से रिटेलर सब्जी को नुकसान की भरपाई के लिए थोड़े ऊंचे दामों पर बेचते हैं। आढ़तियों की ओर से किसानों को पक्के बिल दिए जाते हैं।