सूबे में तेजी से फैल रहे स्वाइन फ्लू पर मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने विधानसभा में हल्की नोकझोंक के बीच स्थिति साफ की। परमार ने कहा कि हिमाचल में स्वाइन फ्लू से जो मौतें हुई हैं, उनमें कई मरीज मधुमेह, हार्ट और अन्य बीमारियों से ग्रसित थे।
स्वाइन फ्लू का वायरस बीमारियों से ग्रसित लोगों के शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाता है। शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता कम होने की वजह से ही प्रदेश में 16 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
स्वाइन फ्लू महामारी नहीं है। हिमाचल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लोग भी इस बीमारी से ग्रसित हैं। स्वास्थ्य मंत्री की ओर से विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों पर हल्की नोकझोंक भी हुई।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आंकड़े दिखाकर आप क्या जताना चाहते हैं? हिमाचल में स्वाइन फ्लू पर अंकुश नहीं लग रहा है। परमार ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में पिछले 4 सालों से स्वाइन फ्लू फैल रहा है।
वर्ष 2015 में 123, वर्ष 2016 - 14, 2017 - 77, 2018 - 7 मामले सामने आए थे। इस साल 115 के करीब लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं। इस साल आठ जनवरी को पहला मामला सामने आया।
3 फीट की दूरी बनाकर रखें मरीजों से
लोगों को इस बीमारी से ग्रसित मरीजों से 3 फीट की दूरी बनाई रखनी चाहिए। यह बीमारी हवा में फैलती है। मरीजों के छींकने, खांसने से बीमारी का वायरस दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाता है।
पंजाब में हुईं सबसे ज्यादा मौतें
परमार ने कहा कि ऐसा नहीं है कि स्वाइन फ्लू का प्रकोप हिमाचल में ही है। यह बीमारी बाहरी राज्यों में भी फैली है। 27 जनवरी तक पंजाब में 164 मामले सामने आए हैं और 26 लोगों मौत हुई है जबकि हरियाणा में 363 और 2 लोगों की मौत, उत्तराखंड में 17 मामले और एक की मौत, चंडीगढ़ में 10 मामले सामने आए हैं।