सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक सदन में काली पट्टी पहनकर पहुंचे। विपक्ष ने सुबह कार्यवाही शुरू होने से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा करवाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और विपक्ष के अन्य सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अड़े रहे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को शोकोद्गार के बाद हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक सदन में काली पट्टी पहनकर पहुंचे। विपक्ष ने सुबह कार्यवाही शुरू होने से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा करवाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और विपक्ष के अन्य सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अड़े रहे। इस दौरान सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से खूब हंगामा और नारेबाजी हुई। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के लिए मंजूर कर लिया।
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विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। सरकार को सत्ता पर रहने का अधिकार नहीं है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री बोले कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पांच साल में सिर्फ एक बार ही लाया जा सकता है। जनता के दबाव में कांग्रेस इस प्रस्ताव को लेकर आई है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए। अग्निहोत्री सदन मेंमुख्यमंत्री और मंत्रियों से इस्तीफा देने की मांग करते रहे। करीब 3:30 बजे विपक्ष के हंगामे पर विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर बाद 3:45 बजे तक की स्थगित कर दी।
फिर दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू की गई। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को अवगत करवाया कि विपक्ष के विधायकों ने उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करवाने के लिए नोटिस दिया है। इसे स्वीकार किया गया है। वीरवार सुबह 11:00 बजे सदन में इस पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का सदन में जवाब वीरवार तीन बजे देंगे। विपक्ष दबाव बना रहा था कि इस पर रात 12 बजे तक चर्चा का समय दिया जाए, ताकि सभी सदस्य अपनी बात रख सकें।
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प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के सदस्यों की गिनती की। इनमें 22 कांग्रेस विधायक और 1 माकपा विधायक शामिल रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि चर्चा के लिए कितना समय तय करना है, यह अध्यक्ष निर्धारित करेंगे। इसके लिए विपक्ष को दबाव नहीं बनाना चाहिए। दोनों ओर से कितने सदस्य बोलेंगे, यह दोनों पक्षों को खुद तय करना है। इसके बाद सदन की कार्यवाही वीरवार के लिए स्थगित कर दी गई।