सदन में नोकझोंक के बीच सीएम जयराम ठाकुर मुकेश की ओर इशारा कर बोले - मेहरबानी करके हिमाचल को पंजाब मत बनाइए, इसे हिमाचल ही रहने दें। यह देवभूमि है। यहां के लोगों को चैन से रहने दें। ये आम चुनाव में हारे, उपचुनाव में हारे। बूथ में हारे। इन्हें शर्म नहीं है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरभद्र सिंह और किसी अन्य नेता का नाम लिए बगैर कहा कि अनुभवी लोगों की कमी के कारण ही कांग्रेस का यह हाल है। जयराम ठाकुर बोले कि ये लोग बहुत जल्दबाजी में हैं, न जाने क्यों ऐसी जल्दी है। कांग्रेस में आपसी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है।
आने वाले दिनों में यह और भी बढ़ जाएगी। जयराम ठाकुर मंगलवार को सदन में कांग्रेस के वाकआउट के बाद बोले। सीएम ने कहा कि उन्होंने सदन में बहुत से नेताओं को देखा है, जिन्होंने विपक्ष की भूमिका निभाई है। सदन की गरिमा को ऐसे ठेस पहुंचाना उचित नहीं है।
विपक्ष एक बार नहीं, अनेेक बार एक ही बात दोहरा रहा है। इसी विषय को मंगलवार को नियम-130 के तहत चर्चा के लिए लाया गया है। जिस विषय को विपक्ष के विधायक नियम-67 में चर्चा के लिए मांग रहे हैं, उसी विषय के बारे में कई विधायकों ने नियम-130 में चर्चा मांगी है।
इस बारे में अपनी ओर से ईमानदार प्रयास किए जाने चाहिए। मंगलवार को नियम-67 के तहत कांग्रेस ने चर्चा के लिए अलग विषय उठाया था। अगर महंगाई पर बात होनी थी तो उसी पर यह की जानी चाहिए थी।
विधानसभा शीत सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट को लेकर फिर हंगामा किया। विपक्ष इन्वेस्टर्स मीट को लेकर सरकार से चर्चा करने और श्वेत पत्र जारी करने की मांग पर अड़ा रहा। वहीं, दूसरी ओर जयराम सरकार ने इन्वेस्टर्स मीट के लिए हिमाचल के प्रयासों को सराहने वाला यूएई के राजदूत का पत्र जारी किया। आठ नवंबर को जारी पत्र में भारत में संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत डॉ. अहमद अल बना ने मीट के सफल आयोजन के लिए हिमाचल सरकार के प्रयासों की सराहना की है।
मुख्यमंत्री को लिखे एक गए पत्र में उन्होंने कहा है कि यह सम्मेलन न केवल विचारों व अवसरों के आदान-प्रदान के लिए उपयुक्त मंच बना, बल्कि इससे संचार के नए माध्यम भी सृजित हुए। राजदूत ने प्रदेश सरकार के इस भव्य आयोजन के सफल प्रयासों को सराहते हुए कहा कि इससे पूर्व विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कभी इस तरह के प्रयास नहीं किए गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व से हिमाचल में विदेशी निवेश को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने आशा व्यक्त की है कि संयुक्त अरब अमीरात और हिमाचल प्रदेश के मध्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, आतिथ्य और चिकित्सा के क्षेत्रों में सामंजस्य स्थापित होगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत 60 मिलियन यूएस डॉलर के व्यापार के साथ यूएई का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है। इसके अतिरिक्त यूएई में भारतीय मूल के 30 लाख लोग रह रहे हैं, जिस कारण भारत और यूएई के मध्य संबंध वाणिज्यिक व्यापार से व्यापक रणनीतिक संबंध में बदल गया है।
मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी की हिमाचल रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के चेयरमैन के रूप में नियुक्ति के बहाने विपक्ष ने जयराम सरकार को घेर लिया है। सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि प्रदेश में रेरा के गठन की जरूरत नहीं है। यह बात सीएम ने लिखकर भेजी है। अब वही मुख्यमंत्री हिमाचल में रेरा के गठन के पक्ष में हो गए। रेरा के चेयरमैन की नियुक्ति कर दी गई। 46 पद स्वीकृत कर दिए गए।
मुकेश ने रेरा के बहाने मुख्यमंत्री के साथ अफसरों को भी घेर लिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि रेरा को अफसरी भाषा में रूपी अर्निंग रेगुलेटरी अथारिटी कहा जाता है। आखिर रात के अंधेरे में रेरा क्यों बनाई गई। जनता सब समझ रही है। रेरा के बहाने सरकार अब भारत के बिल्डरों को हिमाचल में लाएगी। करोड़ों रुपये के फ्लैट बिकेंगे तो हिमाचल में होम स्टे का कारोबार ठप हो जाएगा। हजारों हिमाचली बेरोजगार हो जाएंगे और वे कर्ज तले दब जाएंगे।