हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक क्षेत्रों में बागवानों की चिंता तब और बढ़ गई है जब शोध में एक नए जीव को सेब के पेड़ों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के जैवविज्ञान विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि रॉयल पिका (Ochotona royali) नामक यह जीव, जो आकार में छोटा और चूहे से थोड़ा बड़ा होता है, किन्नौर की बास्पा घाटी में सेब के पेड़ों के तनों को कुतरकर उन्हें बर्बाद कर रहा है, जिससे पौधे सूख रहे हैं।
अध्ययन का खुलासा और रॉयल पिका का खतरा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के जैवविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार नेगी की देखरेख में शोधकर्ताओं गौरी शर्मा और श्रुति कपूर द्वारा किए गए इस अध्ययन को 'एनवायरनमेंटल मॉनीटरिंग एंड असेसमेंट' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। यह भारत में पहली बार है जब पिका द्वारा सेब के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकरण किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि बास्पा घाटी में मानव-वन्यजीव संघर्ष बागवानी और कृषि के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।
शोध में यह भी प्रकाश डाला गया है कि हिम तेंदुआ और एशियाई काला भालू जैसे जीव पशुधन पर हमलों के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि बंदर और वेस्टर्न ग्रे लंगूर फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, भरल (हिमालयी नीली भेड़) भी फसल कटाई के मौसम में क्षति पहुंचाता है। हालांकि, रॉयल पिका का सेब के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले जीव के रूप में सामने आना शोध का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के बदलते स्वरूप
शोधकर्ताओं का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, भूमि उपयोग में बदलाव और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों में मानवीय हस्तक्षेप के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की प्रकृति बदल रही है। इस संदर्भ में, रॉयल पिका का सेब के पेड़ों को नुकसान पहुंचाना इस बदलते परिदृश्य का एक और उदाहरण है।
स्थानीय बचाव के तरीके और भविष्य की रणनीति
अध्ययन में स्थानीय लोगों द्वारा अपनाए जा रहे विभिन्न बचाव और शमन उपायों का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. राकेश कुमार नेगी, विभागाध्यक्ष, जैवविज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अनुसार, ग्रामीण लोग पत्थरों के बाड़ लगाते हैं, जिसके बीच यह जीव अपनी बसावट बना लेता है और सर्दियों के लिए भोजन संग्रह करता है। यही जीव सेब के तनों को कुतरता है, जिससे पेड़ सूख जाते हैं।
राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि यह एक स्तनधारी जीव है और सेब के पेड़ों को यह कैसे नुकसान पहुंचा रहा है, इसका विस्तृत अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि स्थानीय बागवानी अधिकारियों से भी इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।