अब तक तीन दिनों में मात्र 75 ही विदेशी-देशी पर्यटक व बीमार लोग एयरलिफ्ट किए गए हैं। जबकि गत मंगलवार व बुधवार को 650 लोग टनल से होकर सुरक्षित मनाली पहुंचे हैं। वीरवार को भी टनल से सैकड़ों लोग मनाली पहुंचे।
कृषि, आईटी व जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि रोहतांग टनल लाहौल घाटी के इतिहास में एक नया अध्याय है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के इस सपने से निश्चित रूप से हजारों जिंदगियां बची हैं।
टनल तैयार होने के बाद लाहौल घाटी साल भर शेष विश्व से जुड़ी रहेगी। 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल मनाली के धुंधी को लाहौल घाटी के सिस्सू से जोड़ती है।
टनल न होने की सूरत में मनाली से रोहतांग दर्रा होते करीब 55 किलोमीटर सफर तय कर धुंधी पहुंचा जा सकता है। लेकिन बर्फबारी के चलते रोहतांग दर्रे से आवाजाही ठप है। ऐसे में रोहतांग टनल ही लाहौल से मनाली पहुंचने का विकल्प है।