सामरिक महत्व की बहुप्रतीक्षित रोहतांग टनल इसी साल एंबुलेंस के लिए खोल दी जाएगी। छह माह तक बर्फ में कैद रहने वाले लाहौल घाटी के लोगों के लिए इमरजेंसी में आगामी अक्तूबर से आने-जाने की सुविधा मिल सकती है। बीआरओ ने टनल की खुदाई अक्तूबर में पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
सर्दियों में बर्फबारी के दौरान मनाली-रोहतांग मार्ग बंद होने पर बीआरओ एंबुलेंस को टनल से जाने की अनुमति दे देगा। अगले साल आम लोगों को पैदल जाने की अनुमति भी देने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, वाहनों के लिए टनल को 2019 में खोलने का लक्ष्य तय किया गया है।
करीब 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल बनने के बाद मनाली से केलांग की दूरी 60 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस टनल के जरिए बर्फ गिरने पर भी लेह लद्दाख में चीन और पाकिस्तान सीमा तक सेना आसानी से पहुंच सकेगी। सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके श्रीवास्तव ने अमर उजाला को बताया कि रोहतांग टनल की खुदाई पूरी होने के बाद घाटी में फंसे मरीजों को विशेष अनुमति पर गुजरने दिया जाएगा।
इसके लिए पहले प्रशासन को रोहतांग टनल के मुख्य अभियंता को सूचित करना होगा। बर्फ में फंसे जनजातीय जिले के लोगों को सर्दियों के दौरान समय पर हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होने से कई बार जान गंवानी पड़ती है। इसके मद्देनजर इसी साल से ही बर्फ गिरने पर इमरजेंसी में टनल के माध्यम से मरीजों को घाटी से बाहर ले जाया जा सकेगा। एके श्रीवास्तव ने कहा कि एंबुलेंस को कुछ बंदिशों के साथ टनल पार करने की अनुमति दी जाएगी। सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
छह माह दुनिया से कट जाता है लाहौल
अक्तूबर-नवंबर में बर्फबारी के बाद लाहौल घाटी छह माह के लिए शेष विश्व से कट जाती है। 15 नवंबर से रोहतांग दर्रा आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया जाता है। अक्सर मौसम खराब रहने के कारण मरीजों को हेलीकॉप्टर सुविधा भी समय पर नहीं मिल पाती है। हर साल मरीजों और गर्भवती महिलाओं को कंधे या पालकी पर उठाकर कई किलोमीटर बर्फ में पैदल चलकर ले जाना पड़ता है। कई मरीज दम तोड़ देते हैं। ऐसे में बीआरओ का फैसला हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत देने वाला होगा।