विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी शंख फूंक चुकी भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रचार वार शुरू हो गया है। परिवर्तन रथयात्रा से पहले प्रथम चरण का प्रदेश व्यापी अभियान शुरू कर भाजपा विपक्षी दल से एक कदम आगे दिख रही है। रथयात्रा को फ्लाप करार देने वाली कांग्रेस की युवा इकाई अब विकास यात्रा की तैयारी में है।
उधर, भाजपा पहले चरण के पार्ट टू के तहत डोर टू डोर पदयात्रा का खाका खींच चुकी है। कांग्रेस भले भाजपा के प्रचार अभियान में सीएम चेहरा नहीं होने से पार्टी के प्रचार को ‘फेसलेस’ करार दे रही है, लेकिन जितने केंद्रीय चेहरे भाजपा ने पिछले दो माह में उतारे, उसके जवाब में केवल वीरभद्र सिंह ही मोर्चे पर डटे दिख रहे हैं।
नगर निगम शिमला पर अपना विजयी ध्वज फहरा कर सियासी सेमीफाइनल जीत चुकी भाजपा विधानसभा चुनाव के प्रचार में डट गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की टीम चुनाव तैयारियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। शाह दो महीने में तीसरी बार हिमाचल आ रहे हैं, जबकि कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप से आनंद शर्मा और मनीष तिवारी जैसे चेहरे ही प्रदेश में दिखे।
चार संसदीय क्षेत्रों में केंद्रीय और दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री को सवार कर परिवर्तन रथ दौड़ा चुकी भाजपा अब यात्रा के समापन की ओर है। 8 जुलाई तक भाजपा अपनी परिवर्तन रथों के पहिये रोक डोर टू डोर अभियान के लिए पदयात्रा शुरू करने जा रही है। विधायकों, दावेदारों और सांसदों के साथ पदयात्राओं में प्रदेश के नेता प्रेम कुमार धूमल, जेपी नड्डा और शांता कुमार की सभाएं भी होंगी।
इसके अलावा केंद्रीय नेताओं की जनसभाएं भी इस दौरान प्रस्तावित हैं। उधर, कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री प्रदेश भर में घूम रहे हैं, लेकिन प्रदेश संगठन का कोई बड़ा प्रचार कार्यक्रम नहीं शुरू हुआ। यूथ कांग्रेस जरूर विकास यात्रा पूरे प्रदेश में शुरू करने जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस को आलाकमान से जोड़ने की कमजोर कड़ी
राष्ट्रीय दलों को प्रदेश इकाइयों से जोड़ने की कड़ी माने जाने वाले पार्टी प्रदेश प्रभारियों में भाजपा आगे दिख रही है। भाजपा ने श्रीकांत शर्मा के यूपी में मंत्री बनते नए प्रभारी मंगल पांडेय को तैनात कर दिया। लगभग सवा महीने में पांडेय ने प्रदेश के नेताओं के साथ राज्य के अधिकांश जिलों का भ्रमण का सियासी नब्ज भी टटोली ली है।
उधर, कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी का कई महीनों से हिमाचल आना ही नहीं हुआ। अंबिका प्रभार छोड़ना चाहती हैं, लेकिन उनका विकल्प कांग्रेस आला कमान नहीं दे पाई। ऐसे में कांग्रेस की संगठनात्मक गतिविधियों के साथ प्रचार अभियान पूरी तरह प्रदेश कांग्रेस के भरोसे है। प्रदेश कांग्रेस और सरकार में अनबन की स्थिति प्रभारी के निष्क्रियता से जोड़ी जा रही है।
भाजपा ने साधे नड्डा, धूमल कैंप
भाजपा में धूमल और नड्डा कैंप में खेमेबाजी पर केंद्र की पैनी नजर है। दोनों कैपों को साधने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी एक समान भूमिका तय कर विराम देने की रणनीति पर काम किया। परिवर्तन रथ यात्रा में धूमल, नड्डा और शांता को प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी सौंपने के पीछे यही मकसद था। हालांकि, नड्डा के मंच से कांग्रेस के एक एसोशिएट विधायक का भाजपा में शामिल होने का संकेत दूसरे कैंपों की खलबली बढ़ा रहा है।