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जब साथियों ने सैनिक को मौत के मुंह में धकेला

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देश की सरहदों पर तैनात एक सैनिक मढ़ी स्थित रेस्क्यू पोस्ट पर अव्यवस्था का शिकार हुआ। शनिवार रात को अगर सैनिक बर्फ से हिम्मत हार जाता तो देश का यह प्रहरी शायद अपनी जान गंवा बैठता।
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सैनिक का आरोप है कि उन्हें रात को रेस्क्यू पोस्ट से निकाल दिया गया। उन्होंने दूरभाष पर इसकी शिकायत डीसी लाहौल और पर्वतारोहण संस्थान मनाली के निदेशक से की है।

सैनिक सुरेश की मानें तो वह शनिवार को लाहौल स्थित अपने घर से मनाली रवाना हुए। रोहतांग में बर्फीले तूफान के कारण सड़क बंद हो गई। उन्हें चीन सीमा पर स्थित समदो बॉर्डर पर 31 दिसंबर तक ड्यूटी ज्वाइन करनी थी।
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वह पैदल रोहतांग दर्रा पार कर मढ़ी की ओर रवाना हुए। बर्फीली हवाओं के बीच शून्य से करीब बीस डिग्री तापमान में करीब सवा दस बजेे मढ़ी स्थित रेस्क्यू पोस्ट पहुंचे। हालांकि, पोस्ट पर तैनात जवानों ने उन्हें खाना खिलाया।
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आधी रात को पोस्ट से बाहर निकाला

आरोप है कि वहां तैनात एक रेस्क्यू कर्मी किसी बात पर उनसे उलझ गया और वहां से निकल दिया। सुरेश रात के करीब 12 बजे पैदल मढ़ी से मनाली रवाना हुए और सुबह लगभग 5 बजे पहुंचे। बर्फ में चलने से उनकी आंखों में कुछ दिक्कत पेश आई है।

उन्होंने उपायुक्त लाहौल-स्पीति हंसराज चौहान और पर्वतारोहण संस्थान मनाली के निदेशक कैप्टन सहलूरिया से दूरभाष पर मामले की शिकायत की है। सुरेश के मुताबिक लाहौल-स्पीति प्रशासन ने बर्फ  में पैदल रोहतांग दर्रा आर-पार करने वालों की सुरक्षा को मढ़ी और कोकसर में रेस्क्यू पोस्ट तैनात की है।

बर्फबारी में फंसे यात्रियों को यहां शरण दी जाती है। सैनिक के आरोपों के बाद इन पोस्टों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश जनजातीय सलाहकार परिषद सदस्य प्यारेलाल शर्मा ने कहा कि मामले की जांच कर दोषी कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उधर, पर्वतारोहण संस्थान मनाली के निदेशक कैप्टन रणधीर सिंह सहलूरिया ने कहा कि उन्हें दूरभाष पर शिकायत मिली है। मामला काफी गंभीर है। इसकी विभागीय जांच की जाएगी। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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