ऐसे में बर्फ पिघलने की रफ्तार और बढ़ गई है। घाटी के बुजुर्ग दोरजे, कर्म सिंह, डोला राम और टशी छेरिंग का कहना है कि उनके समय में जुलाई तक रोहतांग दर्रा बर्फ से लकदक रहता था। टैक्सी चालक सुरेश और कामी ने बताया कि रोहतांग में अब सैलानी मायूस हो रहे हैं।
केलांग से करीब 71 किलोमीटर दूर लेह के रास्ते में पड़ने वाला 16000 फीट की ऊंचाई पर बारालाचा दर्रा अब सैलानियों की सैरगाह बन गया है। लाहौल होकर रोजाना सैलानी बारालाचा का रुख कर रहे हैं। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि बारालाचा दर्रे को पर्यटन के तौर पर विकसित करने के लिए मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है।