उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में शिक्षकों की नियुक्ति चयन परीक्षा की मेरिट के आधार पर करने की पैरवी की गई है। अब इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मामला मंत्रिमंडल की बैठक में भी लाया जा सकता है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कमेटी ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सीबीएसई स्कूलों के लिए पहले 136 विद्यालयों के हिसाब से लगभग 6,200 पदों की कैडर स्ट्रेंथ तय की गई थी। अब ऐसे स्कूलों की संख्या 158 हो चुकी है, जिनमें से करीब 151 विद्यालय संचालन में हैं। इन स्कूलों में बढ़ रहे दाखिलों को देखते हुए शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ी है। समिति का मानना है कि चयन परीक्षा के माध्यम से योग्य शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी बड़ी संख्या में पद रिक्त रह सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त पदों की व्यवस्था भी करनी होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेरिट आधारित तैनाती का अर्थ यह नहीं होगा कि वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षक अपने स्कूलों से हट जाएंगे। जहां आवश्यकता होगी और प्रशासनिक दृष्टि से उचित होगा, वहां कुछ शिक्षकों को उसी स्कूल में बनाए रखने का विकल्प भी अपनाया जाएगा।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की नाराजगी को लेकर है। कई शिक्षक संगठन मेरिट आधारित तैनाती का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को दूरदराज और कठिन क्षेत्रों में स्थानांतरित होना पड़ सकता है। हालांकि, समिति ने अपनी रिपोर्ट में कानूनी पक्ष को प्राथमिकता देते हुए कहा है कि यदि सीबीएसई स्कूलों के लिए बनाई गई सब-कैडर व्यवस्था के अनुरूप नियुक्तियां नहीं की गईं तो मामला फिर से न्यायालय पहुंच सकता है। ऐसे में भविष्य के कानूनी विवादों से बचने के लिए मेरिट आधारित तैनाती सबसे उपयुक्त विकल्प होगा।