बच्चों को मजबूरन स्कूल के बरामदे तथा मैदान में पढ़ाना पड़ रहा है।
- फोटो : राजेश हंसरेटा
रोहल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल रहने का दम भरने वाली प्रदेश सरकारों के सभी दावों की पोल खोल रहा है। कई सालों से रोहल स्कूल में एक भवन में तीन-तीन स्कूलों की कक्षाएं लग रही हैं। स्कूल में क्लास रूम तीन और कक्षाएं 16 चल रही हैं। ऐसे में कई कक्षाएं के बच्चे खुले आसमान तले पढ़ाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनको बैठने के लिए टाट पट्टी तक नसीब नहीं हो रही है।
कुछ बच्चे स्कूल के बरामदे पढ़ने को मजबूर हैं। बारिश में तो हालत और भी खराब हो जाती है। उच्च स्कूल रोहल में केंद्रीय प्राथमिक स्कूल रोहल तथा प्राथमिक स्कूल मझवाड़ी भी चल रहा है। उच्च स्कूल में छात्रों की संख्या करीब 90 है। प्राथमिक स्कूल रोहल तथा प्राथमिक स्कूल मझवाड़ी में छात्रों की संख्या मिलाकर करीब 30 है। इसके चलते तीन क्लास रूप में पहली से दसवीं तक के छात्रों को पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी संभव नही है।
ऐसी स्थिति में बच्चों को मजबूरन स्कूल के बरामदे तथा मैदान में पढ़ाना पड़ रहा है। प्राथमिक स्कूल मझवाड़ी तथा केंद्रीय प्राथमिक स्कूल रोहल के लिए नया भवन बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। लेकिन स्कूल भवन निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। रोहल में शिक्षा व्यवस्था रामभरोसे है। जिससे बच्चों के अभिभावक भी काफी चिंतित है। हाई स्कूल रोहल में कुल मिलाकर आठ कमरे हैं। इनमें से तीन कमरों में बच्चों की पढ़ाई, दो में ऑफिस, दो कंप्यूटर रूम और एक स्टोर है।