कार्टरोड से पीठ पर मंडी तक पहुंचानी पड़ रही सब्जियां
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मुख्य सड़क पर उतर रहा सामान, हर नग के 20 की जगह देने पड़ रहे 50 रुपये कॉमन इंट्रो
राजधानी की लोअर बाजार सब्जी मंडी को जोड़ने वाली सड़क भूस्खलन से धंस गई है। इसका खामियाजा किसानों, आढ़तियों और व्यापारी भुगत रहे हैं। सब्जी मंडी मैदान तक वाहन नहीं पहुंचने से अब कार्ट रोड पर ही सामान उतारना पड़ रहा है। इसके बाद मजदूरों के सहारे सामान की ढुलाई करानी पड़ रही है। इससे मजदूरी 20 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति नग हो गई है। बढ़ते खर्च और समय की बर्बादी ने मंडी कारोबार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को संवाददाता ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट :-
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कार्ट रोड से सब्जी मंडी को जाने वाला संपर्क मार्ग सोमवार को यातायात के लिए बंद रहा। रविवार सुबह बारिश के कारण धंसी सड़क के चलते वाहनों की आवाजाही ठप हो गई जिससे किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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सड़क की खराब स्थिति के कारण माल लेकर आने वाले वाहन अब सीधे मंडी परिसर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।सोमवार को सब्जियां लेकर पहुंचे किसानों को कार्ट रोड पर ही अपना सामान उतारना पड़ा। इसके बाद मंडी तक सामान पहुंचाने के लिए मजदूरों का सहारा लेना पड़ा। कारोबारियों को भी इससे परेशानी हुई। बाहरी राज्यों से आई सब्जियों और फलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए कार्ट रोड से मजदूर लगाने पड़े। इससे ढुलाई का खर्च ढाई गुना तक बढ़ गया है। इसका सीधा असर किसानों और कारोबारियों पर पड़ रहा है। पहले कार्ट रोड से मंडी तक एक नग पहुंचाने के लिए मजदूर 20 रुपये लेते थे लेकिन रास्ता टूटने के बाद अब यह शुल्क 50 रुपये प्रति नग (सामान का एक पीस) हो गया है।
जुब्बड़हट्टी से सब्जियां लेकर मंडी पहुंचे किसान राम स्वरूप ने बताया कि उन्हें रास्ता टूटने की जानकारी नहीं थी। यदि पहले पता होता तो वह अपनी फसल किसी दूसरी मंडी में ले जाते। वहीं किसान अमर नाथ ने बताया कि अतिरिक्त मजदूरी का खर्च हजारों रुपये तक पहुंच रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। पहले ही खेती, परिवहन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। अब सड़क खराब होने के कारण अतिरिक्त ढुलाई खर्च भी उठाना पड़ रहा है। आढ़तियों का कहना है कि खराब सड़क के कारण सामान को मंडी तक पहुंचाने में अधिक समय लग रहा है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई बार नाजुक फल और सब्जियां खराब भी हो जाती हैं। थोक विक्रेताओं को सब्जियां महंगे दामों पर मिल रही हैं, इसलिए वह परचून विक्रेताओं को भी ऊंचे दाम पर बेचने को मजबूर हैं। इसके चलते कुछ सब्जियों के दामों में हल्की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
मंडी में घट सकती है किसानों की संख्या
सड़क बंद होने से आने वाले दिनों में मंडी में सब्जियां लेकर आने वाले किसानों की संख्या घट सकती है, जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा। मंडी में सब्जियों की आवक कम होने से दामों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। -सोहन सिंह, थोक विक्रेता
मंडी तक फसल पहुंचाने में हो रही परेशानी मुख्य सड़क से मंडी तक सब्जियां पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही है। किसानों का खर्च बढ़ने के कारण उन्हें भी सब्जियां महंगे दामों पर मिल रही हैं। यदि जल्द ही यह रास्ता ठीक नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कारोबार और अधिक प्रभावित हो सकता है। -नंदलाल, थोक विक्रेता
महंगे हो गए हैं सब्जियों के दाम मंडी तक सब्जियां पहुंचाने की लागत बढ़ने से सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं। अब एक किलो की जगह आधा किलो सब्जी ही खरीदनी पड़ रही है। फलों के दामों की भी यही स्थिति है।
घर का खर्च निकालना हो रहा मुश्किल सब्जियों के दाम बढ़ने से घर का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। बच्चों के स्कूल के लिए रोज सब्जी बनाकर भेजनी पड़ती है। मटर 100 रुपये किलो थे, इसलिए उन्हें खरीदने की हिम्मत नहीं हुई। उनकी जगह दूसरी सब्जी खरीदनी पड़ी।