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चीन का दावा नकारा, दलाईलामा ही चुनेंगे अपना उत्तराधिकारी, 800 साल पुरानी परंपरा रहेगी कायम

Thu, 28 Nov 2019 07:44 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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दलाईलामा
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15वें दलाईलामा के चयन को लेकर धर्मशाला में प्रस्ताव पारित कर वरिष्ठ बौद्ध लामाओं ने चीन सरकार के दलाईलामा के पुनर्जन्म पर अधिकार के दावे को नकार दिया। उन्होंने साफ कहा कि दलाईलामा के चयन को लेकर चीन का कोई रोल नहीं है। 

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धर्मशाला में बुधवार शाम को निर्वासित तिब्बत सरकार के धर्म एवं संस्कृति विभाग की ओर से तीन दिवसीय तिब्बती धार्मिक सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें दुनिया भर से वरिष्ठ बौद्ध लामाओं और निर्वासित तिब्बत सरकार के नेताओं ने भाग लिया।

इसमें दलाईलामा के पुनर्जन्म को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें कहा गया कि दलाईलामा के अगले पुनर्जन्म के विषय में निर्णय का अधिकार पूरी तरह से दलाईलामा का रहेगा।
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किसी सरकार या अन्य व्यक्ति के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होगा। यदि चीन सरकार दलाईलामा के लिए उम्मीदवार चुनती है तो तिब्बती लोग उस उम्मीदवार का सम्मान नहीं करेंगे और न ही मान्यता देंगे।

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अविभाज्य रहा कार्मिक बंधन

परंपराओं का होगा निर्वहन - फोटो : अमर उजाला
इस सम्मेलन के माध्यम से धार्मिक प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने संकल्प पारित करते हुए कहा कि दलाईलामा और तिब्बती लोगों के बीच का कार्मिक बंधन अविभाज्य रहा है। तिब्बती लोगों की वर्तमान स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सभी तिब्बती वास्तव में भविष्य में दलाईलामा के संस्थान और पुनर्जन्म की निरंतरता की कामना करते हैं। इसलिए हम दलाईलामा के लिए दृढ़ता से उसी का समर्थन करते हैं।

800 साल पुरानी तिब्बती बौद्ध परंपराओं का होगा निर्वहन
वरिष्ठ बौद्ध लामाओं ने कहा कि दलाईलामा के पुनर्जन्म को लेकर 800 साल पुरानी तिब्बती बौद्ध परंपराओं का निर्वहन ही किया जाएगा। यह पद्धति बुद्ध के मूल दर्शन के अनुरूप है और 800 साल पहले तिब्बत में शुरू हुई थी। 
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