साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच बढ़ती रार पार्टी की चिंता बढ़ा रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री लोक लुभावनी योजनाएं के दम पर जनता के बीच सरकार की साख बढ़ाने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन के साथ मतभेदों ने अभी से विपक्ष के हाथ चुनावी मुद्दा थमा दिया है।
पिछले डेढ़ साल में सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों से लेकर अनुबंध कर्मियों, शिक्षकों के हित को लेकर कई अहम फैसले लिए, लेकिन बेरोजगारी भत्ते के मुद्दे पर संगठन और सरकार के बीच दिखी सियासी प्रतिस्पर्धा से मतभेद खुलकर सामने आ गए। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच लगातार बढ़ती तल्खी से अब दिल्ली आलाकमान भी चिंतित दिख रही है।
सत्ता बचाने के लिए सरकार ने कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं को फोकस में रखकर घोषणाओं का रोडमैप तैयार किया है, लेकिन संगठन के साथ तालमेल का अभाव मुख्यमंत्री की चुनावी रणनीति को पलीता लगाता दिख रहा है।