देश की सुरक्षा में तैनात हिमाचल के एक और जवान वतन पर कुर्बान हो गया है। मणिपुर के चंदेल जिले में सोमवार सुबह हुए एक आईईडी ब्लास्ट में मंडी के पंडोह निवासी राइफल मैन इंद्र सिंह (35) समेत दो जवान शहीद हो गए।
छह जवान घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक राजधानी इंफाल से 64 किलोमीटर दूर चंदेल शहर के महामनी गांव में सुबह के समय जवान गश्त कर रहे थे तो उनके शिविर के पास एक धमाका हो गया।
इसमें राइफल मैन इंद्र सिंह और सोहन लैन की जान चली गई। उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने कहा कि प्रशासन को जवान के शहीद होने की सूचना मिली है।
सोमवार शाम को जैसे ही परिजनों को सूचना मिली, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। इंद्र सिंह अपने पीछे माता, पत्नी और छह साल का बेटा छोड़ गए हैं। पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। मंगलवार को पैतृक गांव पंडोह में शहीद का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।
इंद्र वर्ष 2003 में असम राइफल में भर्ती हुए थे। आईईडी धमाके में एन श्याम कुमार, एस सरकार, तीरेंद्र नाथ दास, राम गोविंद सिंह, निर्मल राय और लालनुनपुइया घायल हुए हैं।
रविवार रात को की थी मां-पत्नी से बात
इंद्र सिंह के मामा मान सिंह ने बताया कि भांजे की शहादत पर उन्हें फख्र है। असम राइफल के अधिकारियों ने सूचना दी कि इंद्र सिंह की पार्थिव देह हवाई जहाज से चंडीगढ़ लाई जा रही है।
यहां से सड़क मार्ग से पंडोह गांव पहुंचाई जाएगी। शहीद का परिवार पंडोह में नए घर में रहता है। उनका पुराना घर पंडोह के बग्योध में है। मान सिंह ने बताया कि उनका भांजा जुलाई में छुट्टी पर घर आया था।
रविवार रात को ही उसने घर फोन कर पत्नी इंद्रा देवी और मां से बात की थी। परिजनों को अपना ख्याल रखने और जल्द घर आने की बात कहकर फोन रख दिया।
सोमवार को उनकी शहादत की सूचना मिलने के बाद परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। छह साल का बेटा अपने पिता का इंतजार कर रहा है।
बीते साल भी चंदेल में शहीद हुआ था मंडी का लाल
22 मई 2016 को भी गोहर के सैगलागलू गांव के भूपेंद्र ठाकुर भी मणिपुर के चंदेल जिले में घात लगाकर किए हमले में शहीद हो गए थे। मई 2016 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में मंडी के नेरचौक के सीआरपीएफ जवान सुरेंद्र को वीरगति प्राप्त हुई थी।
छुट्टी आ रहे मेजर की घर के पास हृदयाघात से मौत
देश की सरहद से छुट्टी पर घर आ रहे सूबेदार मेजर मदन लाल की घर के पास हृदय गति रुकने से मौत हो गई। सूबेदार मेजर मदन लाल कुठेड़ (लाहड़ी) तहसील जवाली के रहने वाले थे।
राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 20 पंजाब का यह जवान लेह में कार्यरत था। परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक वह छुट्टी पर घर आ रहे थे।
घर से मात्र तीन किलोमीटर दूर ही हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। उनका 20 वर्षीय बेटा भी 20 पंजाब में है तथा वह भी लेह में अपनी सेवाएं दे रहा है। पार्थिव देह को उनके बेटे अरविंद ने मुखाग्नि दी।
इस अवसर पर सेना के जवानों ने सलामी दी तथा दो मिनट का मौन रखकर इस बहादुर जवान को अंतिम विदाई दी। मदन की अकस्मात मृत्यु पर उनके गृह क्षेत्र में शोक की लहर है।