चिकित्सक संघ के महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि संशोधित वेतनमान तय करने में भेदभाव व नाइंसाफ ी होने से डॉक्टर उखड़ गए हैं। इनका कहना है कि विसंगतियों को दूर करने का मामला मुख्यमंत्री से उठाया गया था, बावजूद इसके उचित निर्णय नहीं लिया गया।
हिमाचल के पूर्ण राज्यत्व दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से की गई घोषणाओं में डॉक्टरों को निराशा हाथ लगी है। लिहाजा, इस बार यह तय है कि डॉक्टर काले बिल्ले पहनकर नहीं बल्कि हक लेने के लिए सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। चिकित्सक संघ के महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि संशोधित वेतनमान तय करने में भेदभाव व नाइंसाफ ी होने से डॉक्टर उखड़ गए हैं। इनका कहना है कि विसंगतियों को दूर करने का मामला मुख्यमंत्री से उठाया गया था, बावजूद इसके उचित निर्णय नहीं लिया गया।
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उन्होंने कहा कि अनुबंध पर नियुक्त डॉक्टरों और आने वाले समय में नए नियुक्त होने वाले डॉक्टरों के हितों से कुठाराघात किया गया है। उनका जो वेतनमान का स्तर है, उसको 60 फीसदी किया गया है। साथ ही नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस पर भी कैंची चला दी गई है। इसे कतई भी सहन नहीं किया जाएगा। कोरोना महामारी में भी इन्सेंटिव देने में डॉक्टरों के साथ धोखा हुआ है। यह इन्सेंटिव डॉक्टरों को नहीं मिला है। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा है कि दो दिन के भीतर संयुक्त चिकित्सक मोर्चा की बैठक होगी। इसमें संघर्ष का बिगुल बजाने के लिए पूरे प्रदेश के डॉक्टर तैयार रहेंगे।